Tuesday, September 21, 2021
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CAPF के असिस्टेंट कमांडेंट ने नौकरी छोड़ प्रतापगढ़ में चंदन की नर्सरी तैयार की, 60 हजार पौधे लगाए; इसकी एक किलो लकड़ी 20 हजार में बिकती है

उत्कृष्ट ने चंदन की नर्सरी तैयार करने से पहले दक्षिण भारत के कई प्रगतिशील किसानों से इसकी ट्रेनिंग ली है। - Dainik Bhaskar

उत्कृष्ट ने चंदन की नर्सरी तैयार करने से पहले दक्षिण भारत के कई प्रगतिशील किसानों से इसकी ट्रेनिंग ली है।

कोई बिजनेस या खुद का रोजगार शुरू करना चाहते हैं तो चंदन की नर्सरी तैयार करना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके लिए प्रतापगढ़ के उत्कृष्ट पांडेय अच्छा उदाहरण हैं। उत्कृष्ट ने सेंट्रल आर्म्ड पैरामिलिट्री फोर्सेज (CAPF) में असिस्टेंट कमांडेंट की नौकरी छोड़कर प्रतापगढ़ में चंदन की नर्सरी तैयार की है। अब तक 60 हजार से ज्यादा पौधे लगा चुके हैं। बताते हैं कि बाजार में चंदन की एक किलो लकड़ी का दाम 20 हजार रुपए है। इसे तैयार होने में थोड़ा लगता है, लेकिन इसे लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट के तौर पर किया जा सकता है। एक बार लकड़ी तैयार होने पर करोड़ों रुपए का फायदा होगा।

6 साल नौकरी की, अब खेती में दिल लगा दिया

  • उत्कृष्ट प्रतापगढ़ से करीब 25 किलोमीटर दूर मगरौरा विकास खंड में भदौना गांव में रहते हैं।
  • 2011 में UPSC क्वालीफाई करके उत्कृष्ट ने CAPF में बतौर असिस्टेंट कमांडेंट सिलेक्शन पाने में कामयाबी हासिल की थी।
  • लगभग छह साल देश की सेवा करने के बाद 2016 में VRS ले लिया और गांव आकर खेती शुरू कर दी।
  • उत्कृष्ट ने चंदन की नर्सरी तैयार करने से पहले दक्षिण भारत के कई प्रगतिशील किसानों से इसकी ट्रेनिंग ली।
  • इसके बाद इंस्टीट्यूट ऑफ वूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी, बेंगलुरू से ट्रेनिंग ली।
  • 2018 में इसपर काम शुरू किया। पहले नर्सरी तैयार की और 2019 में पौधे रोपे। अब चंदन के पेड़ आठ से 10 फीट के हो गए हैं।
  • उत्कृष्ट अब किसानों को फ्री ट्रेनिंग भी देते हैं। इसके लिए https://www.facebook.com/marceloneagrofarms पर उनसे कोई भी संपर्क कर सकता है।

पत्नी और बड़े भाई ने किया सपोर्ट
उत्कृष्ट बताते हैं कि सेना में अधिकारी की नौकरी छोड़कर एक अलग राह चुनना आसान नहीं था। पत्नी और बड़े भाई का सपोर्ट मिला तो ये संभव हो पाया। पत्नी पंकज पांडेय लखनऊ सचिवालय में समीक्षा अधिकारी हैं और बड़े भाई रिटायर्ड मेजर राजीव पुणे में रहते हैं। उत्कृष्ट बताते हैं कि चंदन की खेती करने वाले दक्षिण भारत के किसानों ने नई राह दिखाई। बताया कि चंदन की खेती कहीं भी की जा सकती है। बस जलजमाव नहीं होना चाहिए, बर्फ ना जमती हो, और जहां की मिट्टी का पीएच 6.5 से 8 के बीच हो। इससे मालूम चला कि चंदन के पेड़ उत्तर भारत में भी लगाए जा सकते हैं।

यह तस्वीर उत्कृष्ट पांडेय की है जो नौकरी को छोड़कर चंदन की खेती कर करोड़ों रुपए कमा रहे हैं।

यह तस्वीर उत्कृष्ट पांडेय की है जो नौकरी को छोड़कर चंदन की खेती कर करोड़ों रुपए कमा रहे हैं।

एक एकड़ में 8 लाख की लागत और मुनाफा दो करोड़

  • एक चंदन का पेड़ लगाने से लेकर तैयार होने में 15 साल तक का समय लेता है।
  • एक एकड़ में 250 पौधे लगाए जाते हैं। अगर सही तरीके से देखभाल करते हैं तो एक एकड़ में कम से कम दो करोड़ रुपए की आमदनी होगी।
  • पौधा लगाने से लेकर इसकी 15 साल तक देखभाल करने तक कुल खर्च 8 से 10 लाख रुपए प्रति एकड़ आता है।
  • चंदन की छाल विभिन्न विशिष्ट गुणों से भरपूर होती हैं जो औषधीय कामों में प्रयोग की जाती है।
  • चंदन के तेल का प्रयोग सौंदर्य प्रसाधन तैयार करने में किया जाता है।
  • चंदन की लकड़ी भारतीय बाजार में 10-15 हजार रुपए प्रति किलोग्राम बिकती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 25-30 हजार रुपए प्रति किलोग्राम है।

चंदन के साथ अन्य खेती करके हर साल 9 लाख की कमाई
उत्कृष्ट बताते हैं कि चंदन के पेड़ों के बीच मेडिशनल प्लांट काली हल्दी भी लगा रखी है। काली हल्दी की मार्केट वैल्यू बहुत ज्यादा है। इसे बेचने से सालभर में दो से तीन लाख रुपए की कमाई हो जाती है। इस साल काली हल्दी का दायरा बढ़ाया है। आगे मुनाफा दो से तीन गुना हो जाएगा। उत्कृष्ट के मुताबिक, काली हल्दी, मीठी नीम, करौंदा जैसे पौधे चंदन के पौधों को सुरक्षा देते हैं। इसके अलावा उत्कृष्ट धान और गेहूं की भी आर्गेनिक खेती करते हैं जिससे दो से तीन लाख रुपये की फसल साल में बिक जाती है।

इसके अलावा चंदन की पौध भी वह बेचते हैं। एक पौधे की कीमत 100 रुपए होती है। महीने में इससे 25 से 30 हजार की कमाई हो जाती है। उत्कृष्ट बताते हैं कि चार एकड़ में एक हजार चंदन के पौधे लगाने में उनका अभी तक चार से पांच लाख रुपया खर्च हुआ है। अब चंदन के पौधों को अमेजन के जरिए भी बेचने की तैयारी है।

चंदन की खेती करने वाले उत्कृष्ट पांडेय पहले सीएपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट के तौर पर काम करते थे।

चंदन की खेती करने वाले उत्कृष्ट पांडेय पहले सीएपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट के तौर पर काम करते थे।

मार्केट कहां है ?
उत्कृष्ट ने बताया कि जैसा कि हम सब जानते हैं कि चंदन की जितनी डिमांड है उतना उत्पादन नहीं है। ऐसे में इसकी मार्केट के लिए परेशान नहीं होना पड़ता। कर्नाटक फारेस्ट , कर्नाटका सोप्स एंड डिटर्डेंट लिमिटेड (KSDL) जैसे बड़े खरीदार हैं जो खुद आपके खेत में आकर पहले टेस्टिंग करते हैं और फिर रेट लगाकर चंदन खरीद लेते हैं। कन्नौज जहां इत्र का काम होता हैं वहां के भी लोकल खरीदार चंदन की खरीद करते हैं।

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