Tuesday, September 21, 2021
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कण-कण में भगवान समाए हुए हैं, हमारे मन में प्रेम और भक्ति है तो परमात्मा मदद जरूर करते हैं

कहानी – एक दिन माता पार्वती शिव जी से प्रश्न पूछ रही थीं और शिव जी उत्तर दे रहे थे। देवी ने एक प्रश्न पूछा, ‘पूरी प्रकृति में परमात्मा बसे हुए हैं। कहते हैं सभी जगह उनका अंश है तो हम उन्हें कहीं से भी प्रकट क्यों नहीं कर सकते हैं? अगर उन्हें प्रकट करना हो तो हमें क्या करना चाहिए?’

शिव जी ने कहा, ‘जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ा तो पृथ्वी ब्रह्मा जी के पास गईं। इसके बाद मैं, ब्रह्मा जी, पृथ्वी और सभी देवता विष्णु जी के पास पहुंचे। वहां पहुंचकर सभी विचार करने लगे कि विष्णु जी को प्रकट कैसे करें? कैसे उन्हें याद करें?’

शिव जी ने आगे कहा, ‘हरि व्यापक सर्वत्र समाना, प्रेम ते प्रकट होहिं मैं जाना। भगवान सब जगह समान रूप से समाहित हैं, प्रेम से उन्हें प्रकट किया जा सकता है। प्रेम का अर्थ है अनुशासित जीवन, प्रेम का अर्थ है, जिसमें सिर्फ देने का भाव हो, प्रेम का अर्थ है मनुष्य अंदर और बाहर से मन, वचन और कर्म में पवित्र हो जाए।’

सीख – परमात्मा तो कण-कण में बसे हैं। अगर हमारी तैयारी प्रेमपूर्ण है तो भगवान कहीं से प्रकट होकर मदद के लिए आ ही जाएंगे।

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