Tuesday, September 21, 2021
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सचिन पायलट 6 दिन दिल्ली में रहे, प्रियंका से मिले बिना ही जयपुर लौटे; उनकी मांगों पर भारी पड़ा गहलोत का नंबर गेम

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सचिन पायलट - Dainik Bhaskar

सचिन पायलट

राजस्थान कांग्रेस में चल रहे सियासी बवाल के बीच पूर्व डिप्टी CM सचिन पायलट 6 दिन दिल्ली में रहने के बाद बुधवार को बिना हाईकमान से मिले ही जयपुर लौट आए हैं। पहले उनके प्रियंका गांधी से मिलने की चर्चा थी, लेकिन ​उनसे भी मुलाकात नहीं हो सकी। पायलट शुक्रवार शाम को दिल्ली पहुंचे थे, तब से ही उनके समर्थक विधायकों और CM अशोक गहलोत खेमे के बीच तीखी बयानबाजी का दौर जारी है।

सचिन पायलट को 6 दिन दिल्ली रहने के बावजूद हाईकमान से बिना मिले लौटने के लेकर कई तरह की सियासी चर्चाएं हैं। कांग्रेस के जानकारों के मुताबिक फिलहाल नंबर गेम मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास होने की वजह से सचिन खेमे की मांगों को तरजीह नहीं दी जा रही है।

पूरे सियासी विवाद के बीच अब तक मुख्यमंत्री गहलोत और सचिन पायलट ने कुछ नहीं बोला है। केवल समर्थक विधायकों के बयान आ रहे हैं। सचिन पायलट के जयपुर लौटने के साथ ही अब सियासी हलचल फिर दिल्ली से जयपुर शिफ्ट हो गई है। पिछले शुक्रवार को सचिन पायलट दिल्ली गए थे, तब से दिल्ली पर सबकी निगाहें टिकी हुई थीं।

सचिन पायलट कैंप को अब तक प्रियंका गांधी या गांधी परिवार के किसी नेता से कोई पॉजिटिव संकेत नहीं मिला है। बीच में अजय माकन ने सब कुछ ठीक होने का बयान जरूर दिया था।

पायलट-गहलोत खेमों में और बढ़ेगी खींचतान
सचिन पायलट की दिल्ली यात्रा को लेकर कयास थे कि पायलट खेमे की मांगों को पंजाब की तर्ज पर सुना जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। अब सचिन पायलट और गहलोत खेमे के बीच खींचतान और बढ़ने के आसार बन गए हैं। गहलोत खेमे की रणनीति पायलट कैंप को छकाने की है। बताया जाता है कि पायलट की दिल्ली यात्रा में उन्हें कोई आश्वासन नहीं मिलने से अब आगे विवाद लंबा खिंचने के आसार बन गए हैं।

गहलोत की इग्नोरेंस थ्योरी से गतिरोध
पायलट खेमा पिछले साल अगस्त में बगावत के बाद हुई सुलह के वक्त तय हुई बातों को लागू करने की मांग कर रहा है। पायलट गुट मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में बराबर की हिस्सेदारी मांग रहा है। इसके अलावा पायलट समर्थक विधायकों के क्षेत्र में अफसरशाही का उनकी बात नहीं मानने का भी आरोप है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इसे मानने को तैयार नहीं है, गतिरोध की सबसे बड़ी वजह यही है।

पंजाब की तर्ज पर समाधान की उम्मीद थी लेकिन कुछ नहीं हुआ
पायलट खेमे को उम्मीद थी कि जिस तरह पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू को सुना गया उसी तर्ज पर सचिन पायलट की बात को भी सुना जाएगा, लेकिन अभी तक कांग्रेस हाईकमान की तरफ से किसी तरह के संकेत नहीं मिले हैंं। अब इस पूरे मसले पर सचिन पायलट के रुख का इंतजार है। पायलट अब जयपुर में समर्थक विधायकों से मिलकर आगे रणनीति बनाएंगे।

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