Tuesday, July 20, 2021
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UP के टॉप पीडियाट्रिक एक्सपर्ट्स की चेतावनी, कहा- ब्लैक फंगस और MIS-C कर सकता है, नौनिहालों को बीमार; ये 5 लक्षण दिखें तो डॉक्टर से मिलें

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उत्तर प्रदेश के 2 हजार से ज्यादा बच्चों पर पोस्ट कोविड बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। इसको लेकर इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक के यूपी चैप्टर प्रभारी डॉ. शलभ कुमार ने चेतावनी दी है। उन्हाेंने कहा, ‘हाल ही में कोरोना से ठीक हो चुके बच्चे की 30 दिन तक हेल्थ मॉनिटरिंग करना जरूरी है। लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। ऐसा करने पर उनकी स्थिति गंभीर होने से बचा सकते हैं’। डॉ. शलभ ने बताया कि पिछले दिनों मुंबई में तीन बच्चों में ब्लैक फंगस के मामले सामने आ चुके हैं। इससे साफ है कि बच्चे भी अब इसकी चपेट में आने लगे हैं। यूपी में 18 साल से कम उम्र के करीब 20 हजार बच्चे कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। अब इनमें 10% यानी 2 हजार से ज्यादा बच्चों पर ब्लैक फंगस, MIS-C जैसी पोस्ट कोविड बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है।

डॉ. शलभ कुमार-एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक, यूपी चैप्टर प्रभारी।

डॉ. शलभ कुमार-एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक, यूपी चैप्टर प्रभारी।

कमजोर इम्यून वाले बच्चे ज्यादा सतर्क रहें
डॉ. शलभ ने कहा, कमजोर इम्युनिटी वाले बच्चों पर ज्यादा खतरा है। चूंकि फंगस हर किसी के घर में होता है, इसलिए थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। फंगस नमी वाले स्थान, फफूंद वाली जगह, लकड़ी पर, गमले में, लोहे पर लगी जंग में, गोबर में व जमीन की सतह पर पाया जाता है। यह वातावरण में मौजूद है। ऐसे में घर या आसपास भी ब्लैक फंगस का खतरा हो सकता है। ये नाक के सहारे लोगों के शरीर में दाखिल होता है।

5 तरह के लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं 1. नाक बंद होना और उसमें भारीपन आना। 2. नाक का डिस्चार्ज होना और हल्का दर्द होना। 3. नाक के ऊपर लालिमा या दाना होना। 4. आंख पर लालिमा आना या सूजन आना। 5. त्वचा पर कालापन आना और धब्बे पड़ना।

प्रदेश में नवजात से लेकर 18 साल आयुवर्ग के करीब 20 हजार बच्चे संक्रमित हुए हैं।- प्रतीकात्मक फोटो

प्रदेश में नवजात से लेकर 18 साल आयुवर्ग के करीब 20 हजार बच्चे संक्रमित हुए हैं।- प्रतीकात्मक फोटो

4 से 6 हफ्ते में MIS-C का खतरा
कोरोना से ठीक होने वाले बच्चों में 4 से 6 सप्ताह में मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (MIS-C) की समस्या उभर रही है। कोरोना की पहली लहर में बच्चों में यह बीमारी नहीं पाई गई थी। जबकि, दूसरी लहर में यह बीमारी बच्चों में उभर कर आ रही है। यह बीमारी भी कोरोना से ठीक हुए मरीजों में देखने को मिली है।

इस बीमारी में इसमें शरीर की त्वचा पर रैशेज पड़ जाते हैं। इसके अलावा बुखार, सांस लेने में कठिनाई, पेट में दर्द, त्वचा और नाखूनों का नीला पड़ना रोग के लक्षण हैं। दिल की धमनी में एन्युरिज्म की समस्या से हार्ट फेल्योर का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा ये ब्रेन, किडनी, फेफड़े को भी प्रभावित करता है। इस सिंड्रोम से पीड़ित बच्चे मल्टी ऑर्गन फेल्योर की चपेट में आ जाते हैं और उनकी मौत हो जाती है। इसमें 4 से 15 वर्ष की आयु के बच्चे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

कैसे करें बचाव ?

1. दांतों की सफाई है अहम
ब्लैक फंगस दांतों और जबड़ों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। ऐसे में दांतों की सफाई सबसे जरूरी है। ब्रश करने में हीलाहवाली न करें। टूथब्रश को डिसइंफेक्ट करके रखें। मसूड़ों और जीभ को स्वस्थ और साफ रखें ताकि अन्य तरह के इंफेक्शन से भी बच सकें।

2. ओरल टिशूज के रंग का बदलना
यदि आप कोरोना मरीज रहे हैं औरआपके ओरल टिशूज और उसके आसपास रंग बदल रहा है तो इसे हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

3. मसूड़ों में पस आना
मसूड़ों में पस या किसी तरह का संक्रमण भी ब्लैक फंगस का शुरुआती लक्षण हो सकता है। उभरे हुए सफेद धब्बों, पस या मसूड़ों में दर्द को लेकर सतर्क रहें।

4. मुंह या गालों का सुन्न होना
मुंह या गालों के आसपास सुन्नपन महसूस होने पर भी ध्यान दें। एक तरफ सूजन, पैरालिसिस, लालिमा, सुन्नपन होने जैसे लक्षण भी ब्लैक फंगस के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। मासंपेशियों में अचानक कमजोरी, लार टपकना भी फंगल इंफेक्शन का लक्षण हो सकता है।

5. दांत-जबड़ों के दर्द को न करे नजरअंदाज
ब्लैक फंगस के कारण व्यक्ति के दांतों या जबड़े में दर्द महसूस हो सकता है।चेहरे पर सूजन आ सकती है। ब्लैक फंगस के कारण हड्डियों में रक्त का संचार बंद हो जाता है, जिससे उसमें गलन शुरू हो जाती है।इलाज में देरी होने पर व्यक्ति का दांत या जबड़ा भी निकालना पड़ सकता है। वहीं आंत-किडनी पर भी असर डालता है।

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