Friday, July 30, 2021
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अरबों डॉलर खर्च करने के बाद भी प्रोजेक्ट बंद, अब पाकिस्तान की सियासी पार्टियों से मदद मांग रहा चीन

पाकिस्तानी मीडिया की कई रिपोर्ट्स में दावा किया जाता रहा है कि चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरोडोर (CPEC) का काम कई महीनों से बंद पड़ा है। इसके सबसे बड़े प्रोजेक्ट (मेन लाइन 1) के बारे में तो खुद चीन ने साफ कर दिया है कि वो पाकिस्तान को 9 अरब डॉलर का कर्ज नहीं देगा। लेकिन, चीन की दिक्कत ये है कि इस प्रोजेक्ट में उसके पहले ही अरबों डॉलर फंसे हैं। CPEC की तमाम शर्तें गोपनीय हैं। लिहाजा, यह कभी सामने नहीं आ पाया कि चीन ने कितना खर्च किया है और पाकिस्तान को उसने किस ब्याज दर पर कितना कर्ज दिया है।

बहरहाल, अब चीन को लगने लगा है कि उसने CPEC को लेकर भूल की है। इसलिए पाकिस्तान में चीन के राजदूत ने सियासी पार्टियों से मदद मांगी है, ताकि इस प्रोजेक्ट में काम आगे बढ़ सके। CPEC के चेयरमेन आसिम सलीम बाजवा पूर्व आर्मी चीफ हैं और उन पर भ्रष्टाचार के बेहद गंभीर आरोप हैं।

प्रोजेक्ट की फिक्र
पाकिस्तान में चीन के एम्बेसेडर नोंग रोंग ने शुक्रवार को एक वेबिनार में हिस्सा लिया। इसका नाम था- सेलिब्रेटिंग 100 इयर्स ऑफ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना। इसमें उन्होंने इशारों में कुछ गंभीर बातें कहीं। रोंग ने कहा- हम पाकिस्तान के साथ काम करना चाहते हैं। बीजिंग चाहता है कि पाकिस्तान की पॉलिटिकल पार्टीज CPEC का समर्थन करें, इसमें मदद करें और नया पाकिस्तान बनाने की दिशा में काम करें। रोंग यह बात तब कर रहे हैं, जबकि चीन इस प्रोजेक्ट पर अरबों डॉलर खर्च कर चुका है, और इमरान सरकार इस प्रोजेक्ट का काम फिर से शुरू नहीं करा पा रही है।

सियासी पैठ बढ़ाना चाहता है चीन
‘द डॉन’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन को अहसास हो चुका है कि CPEC को लेकर पाकिस्तान में कई दिक्कतें हैं। यही वजह है कि वो अब सियासी दलों से बातचीत कर रहा है। अप्रैल में चीनी राजदूत ने पाकिस्तान के बड़े सियासतदानों से बातचीत की थी। इनमें नवाज शरीफ के छोटे भाई शहबाज शरीफ, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी और मौलाना फजल-उर-रहमान शामिल थे। माना जा रहा है कि संसद में CPEC को लेकर उठते सवालों से चीन परेशान है। उसे लगता है कि अगर कॉन्ट्रैक्ट की गोपनीयता भंग हुई तो उससे भारी नुकसान होगा।

इमरान की मुश्किल
पिछले महीने पाकिस्तान की संसद ने CPEC से जुड़ा एक अहम बिल पास किया था। लेकिन, विपक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया था। विपक्ष का कहना है कि सरकार इस मामले से जुड़े तमाम दस्तावेज संसद के जरिए देश के सामने रखे। इमरान सरकार इसके लिए तैयार नहीं हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रोजेक्ट से पाकिस्तान को कोई फायदा नहीं होगा, जबकि चीन करोड़ों डॉलर कमाएगा और उसके अफसरों पर पाकिस्तान का कानून भी लागू नहीं होगा। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, चीन चाहता है कि इमरान सरकार के बजाए फौज CPEC को संभाले। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि इमरान सरकार इस प्रोजेक्ट पर 9 महीने से आगे नहीं बढ़ पाई है।

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