Friday, July 30, 2021
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जाइडस कैडिला अगले सप्ताह कोरोना वैक्सीन के इमरजेंसी यूज की मंजूरी मांग सकती है, यह दुनिया की पहली DNA वैक्सीन होगी

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भारत की बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनियों में शुमार जाइडस कैडिला अगले सप्ताह अपनी कोरोना वैक्सीन जाइकोव-डी के इमरजेंसी यूज अप्रूवल के लिए सेंट्रल ड्रग्स रेगुलेटर को अप्लाई कर सकती है। ऑफिशियल सोर्सेस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

अगर इस वैक्सीन को मंजूरी मिल जाती है, तो यह कोरोनावायरस के खिलाफ दुनिया की पहली DNA वैक्सीन होगी। इसी के साथ देश में उपलब्ध वैक्सीन की संख्या 4 हो जाएगी। अब तक भारत में सीरम इंस्टीट्यूट की कोवीशील्ड, भारत बायोटेक की कोवैक्सिन और रूस की स्पुतनिक V इस्तेमाल हो रही हैं।

फेज 3 ट्रायल का डेटा एनालिसिस लगभग तैयार
एक आधिकारिक सूत्र ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि वैक्सीन के फेज 3 के ट्रायल का डेटा एनालिसिस लगभग तैयार है। कंपनी ने सरकार को इसकी जानकारी दे दी है कि वह अगले सप्ताह वैक्सीन के इमरजेंसी यूज के लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकती है। इस वैक्सीन का टेस्ट बड़ों के अलावा 12 से 18 साल के बच्चों पर भी किया जा रहा है।

सूत्र ने कहा कि अहमदाबाद की यह कंपनी अगले सप्ताह लाइसेंस के लिए आती है, तो उम्मीद है कि हमारे पास यह देखने के लिए पर्याप्त डेटा हो कि क्या यह वैक्सीन बच्चों को भी दी जा सकती है।

स्टोरेज के लिए कोल्ड चेन की जरूरत नहीं
डीएनए-प्लाज्मिड बेस्ड जाइकोव-डी तीन डोज वाली वैक्सीन होगी। इसे 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तापमान पर स्टोर किया जा सकता है। इसके लिए कोल्ड चेन की जरूरत नहीं होती। इससे देश के दूरदराज वाले इलाकों में इसका ट्रांसपोर्टेशन आसान हो जाता है। इस वैक्सीन को डेवलप करने में नेशनल बायोफार्मा मिशन से मदद मिली है।

ऐसे काम करती है यह वैक्सीन
प्लाज्मिड DNA इंसानी शरीर में जाने पर वायरल प्रोटीन बन जाता है। यह शरीर को वायरस के वास्तविक हमले जैसा अनुभव कराता है। इससे शरीर में वायरस के प्रति मजबूत इम्यून रिस्पॉन्स विकसित होता है। यह वायरस को बढ़ने से रोकता है। अगर कोई वायरस अपना आकार-प्रकार बदलता है यानी उसमें म्युटेशन होता है तो इस वैक्सीन को कुछ ही हफ्तों में बदला जा सकता है।

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