Wednesday, July 21, 2021
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हर साल साइबर हमले बढ़ रहे; बचाव पर 9 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च का भी कोई नतीजा नहीं

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बड़ी कंपनियां और सरकारी संस्थान लगातार हमलावरों के निशाने पर। - Dainik Bhaskar

बड़ी कंपनियां और सरकारी संस्थान लगातार हमलावरों के निशाने पर।

  • चीन, रुस, ईरान सहित कई देश अपराधियों को पनाह देते हैं

पिछले एक माह से आयरलैंड की स्वास्थ्य सेवाएं अस्त-व्यस्त हैं। 14 मई को सरकारी सिस्टम- हेल्थ सर्विस एक्जीक्यूटिव (एचएसई) पर साइबर हमले से उसके अधिकतर कंप्यूटर सिस्टम ध्वस्त हो गए। हैकरों ने 148 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी है। सरकार ने फिरौती नहीं दी है। 14 जून तक उसकी सेवाएं सामान्य नहीं हो पाई थीं।

ऐसा ही हमला 7 मई को अमेरिका में कोलोनियल पाइपलाइन कंपनी पर हुआ। कंपनी अमेरिका के पूर्वी तट पर इस्तेमाल होने वाले आधे तेल की सप्लाई करती है। उसने 31 करोड़ रुपए फिरौती चुकाई तब जाकर सप्लाई बहाल हो सकी। ऐसे हमले बड़ी कंपनियों पर अधिक हो रहे हैं। हैकरों के सामने साइबर सिक्योरिटी इंडस्ट्री असहाय है।

माइक्रोसॉफ्ट का अनुमान है, 2020 में बचाव के लिए एंटी वायरस सॉफ्टवेयर और फायरवाल्स जैसे उपायों पर 9.19 लाख करोड़ रुपए खर्च किए गए। यह खर्च पिछले पांच साल में 64% बढ़ा है। बड़ी कंपनियों और संस्थानों ने हैकिंग के खिलाफ इंश्योरेंस कराना शुरू किया है।

इंश्योरेंस कंपनी म्यूनिख आरई के अनुसार 2020 में साइबर इंश्योरेंस बाजार 51 हजार करोड़ रुपए था। इसके 2025 तक 1.48 लाख करोड़ रुपए होने का अंदाज है। कंसल्टेंसी एक्सेंचर के केली बिसेल कहते हैं, बीमा कराने वाले सोचते हैं कि साइबर हमलों से निपटने का आसान तरीका इंश्योरेंस हैं। लेकिन, इससे भविष्य में और अधिक हमलों के लिए बढ़ावा मिलता है।

पिछले साल साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों के ग्रुप-डिबेट सिक्योरिटी की रिपोर्ट में बताया गया कि सुरक्षा के तमाम उपायों के बावजूद हर साल औसत हमले बढ़ रहे हैं। यदि बचाव पर खर्च नहीं बढ़ता तो हमले ज्यादा हो सकते थे। अधिकतर हमले दुश्मन देशों से होते हैं। कोलोनियल पाइप लाइन और एचएसई हमलों के लिए जिम्मेदार गिरोह रूस के हैं।

रेंसमवेयर या साइबर हमले का पहला प्रयास फ्लॉपी डिस्क के माध्यम से वायरस फैलाने से हुआ था। अब टेक्नोलॉजी कंपनियों, स्कूलों,अस्पतालों, उद्योगों, बिजली ग्रिड और सैन्य सिस्टम को निशाना बनाया जा रहा है। फाइनेंशियल इंडस्ट्री साइबर अपराध का नया क्षेत्र है। विशेषज्ञ हमले से किसी बैंक के ध्वस्त होने के संबंध में चिंतित हैं। इंटरनेट नेटवर्क से अधिक डिवाइस के जुड़ने की वजह से साइबर अपराध बदतर हो रहे हैं।

दुनिया में 2013 के बाद साइबर खतरा तीन गुना बढ़ा है। साइबर हमलों के शिकार लोगों में कंपनियां और सार्वजनिक संस्थान शामिल हैं। हमलावरों में सरकारें भी शामिल हैं। वे जासूसी और युद्ध में दुश्मन को नुकसान पहुंचाने की क्षमता का परीक्षण करने के लिए हमले करती हैं। रूस, ईरान और चीन में साइबर अपराधी गिरोहों को छूट देते हैं क्योंकि वे पश्चिमी देशों को नुकसान पहुंचाते हैं।

अधिकतर हमले अमेरिकी कंपनियों पर

  • रूस, चीन,ईरान और पूर्व सोवियत गणराज्यों में साइबर अपराधी धन के लिए दुनियाभर में हमले करते हैं।
  • साइबर खतरों का असर शेयर मूल्यों पर पड़ने लगा है।
  • अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस रेंजम हमलों के बीमा पर पाबंदी लगाना चाहते हैं।
  • 2020 में फिरौती के 2586 करोड़ रुपए क्रिप्टोकरेंसी में दिए गए।
  • पिछले वर्ष ज्यादातर हमले अमेरिकी कंपनियों पर हुए हैं।
  • फ्रांस को पिछले साल साइबर हमलों से 40778 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है।

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