Monday, August 2, 2021
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कलकत्ता हाईकोर्ट से देबजानी मुखर्जी को मिली जमानत, दो अन्य मामलों की वजह से अभी जेल में ही रहना होगा

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पश्चिम बंगाल के चर्चित शारदा चिटफंड घोटाले की आरोपी देबजानी मुखर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से शनिवार को जमानत मिल गई। हालांकि वे जेल से बाहर नहीं आ पाएंगी। मुखर्जी पर ओडिशा और झारखंड में कई केस दर्ज हैं, उन्हें इसमें बेल नहीं मिली है। इसी वजह से वे जेल से बाहर नहीं आ पाएंगी।

शारदा कंपनी के प्रमोटर सुदीप्त सेन और देबजानी मुखर्जी को 2013 में कश्मीर के सोनमर्ग से गिरफ्तार किया गया था। शारदा कंपनी ने बंगाल में कई पोंजी स्कीम चलाई थी, जिसमें लाखों लोगों के साथ हजारों-करोड़ों रुपए डूब गए। इस केस की जांच सीबीआई कर रही है।

ममता सरकार पर भी लगे आरोप
शारदा घोटाले की आंच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत उनके दिग्गज नेताओं तक पहुंच गई थी। बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दिसंबर 2020 में शारदा घोटाले के तार सीएम रिलीफ फंड से भी जुड़े होने का दावा किया गया था।

तब केंद्रीय जांच एजेंसी ने दावा किया था कि सीएम रिलीफ फंड से करीब 6.21 करोड़ तारा टीवी को दिए गए थे, जो शारदा ग्रुप की ही एक कंपनी है। इन पैसों का इस्तेमाल कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए किया गया था।

घोटाले की आंच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तक पहुंची। तब CBI ने दावा किया कि सीएम रिलीफ फंड से करीब 6.21 करोड़ तारा टीवी को दिए गए थे, जो शारदा ग्रुप की ही एक कंपनी है।

घोटाले की आंच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तक पहुंची। तब CBI ने दावा किया कि सीएम रिलीफ फंड से करीब 6.21 करोड़ तारा टीवी को दिए गए थे, जो शारदा ग्रुप की ही एक कंपनी है।

2460 करोड़ का है शारदा चिटफंड घोटाला
शारदा चिटफंड ग्रुप ने पश्चिम बंगाल में कई फेक स्कीम्स चलाई थीं, जिसमें कथित तौर पर लाखों लोगों के साथ फ्रॉड किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शारदा ग्रुप की चार कंपनियों का इस्तेमाल तीन स्कीमों के जरिए पैसा इधर-उधर करने में किया गया। ये तीन स्कीम थीं- फिक्स्ड डिपॉजिट, रेकरिंग डिपॉजिट और मंथली इनकम डिपॉजिट।

इस घोटाले के 2,460 करोड़ रुपए तक का होने का अनुमान है। 2013 में जब इसका खुलासा हुआ, तो लोगों के करोड़ों रुपए डूब गए। उसी साल प्रमोटर सुदीप्त सेन को गिरफ्तार कर लिया गया। पश्चिम बंगाल पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि 80% जमाकर्ताओं के पैसे का भुगतान किया जाना बाकी है।

घोटाले का खुलासा होने के बाद इसके जमाकर्ताओं ने पैसे वापसी के लिए प्रदर्शन शुरू कर दिया।

घोटाले का खुलासा होने के बाद इसके जमाकर्ताओं ने पैसे वापसी के लिए प्रदर्शन शुरू कर दिया।

कैसे सामने आया घोटाला?
2009 में बंगाल के राजनीतिक गलियारों में शारदा ग्रुप के कथित धोखाधड़ी की चर्चा होने लगी। 2012 में सेबी की नजर इस ग्रुप पर पड़ी और फौरन इस तरह की जमा स्कीमों को बंद करने को कहा गया। 2013 में अचानक स्कीम बंद कर दी गई। 18 पन्नों का लेटर लिखकर सुदीप्तो ने कई नेताओं पर पैसे हड़पने को इसके पीछे वजह बताया।

20 अप्रैल 2013 को सुदीप्तो को गिरफ्तार कर लिया गया। शारदा ग्रुप का बिजनेस पश्चिम बंगाल, असम, झारखंड, ओडिशा और त्रिपुरा तक में फैला हुआ था। 2014 में सीबीआई को मामले की जांच सौंपी गई। सीबीआई ने मामले में कुल 46 एफआईआर दर्ज की थीं जिसमें से 3 पश्चिम बंगाल और 43 ओडिशा में दर्ज हुई थीं। झारखंड में भी कुछ मामले दर्ज हैं।

घोटाले की आवाज दिल्ली तक पहुंची थी, तब यहां जंतर मंतर पर भी प्रदर्शन किया गया था।

घोटाले की आवाज दिल्ली तक पहुंची थी, तब यहां जंतर मंतर पर भी प्रदर्शन किया गया था।

किन-किन नेताओं के नाम आए सामने?
शारदा स्कैम में मुख्य आरोपी सुदीप्तो सेन और देबजानी मुखर्जी के अलावा कई टीएमसी नेताओं के नाम आए जिनसे सीबीआई और ईडी ने पूछताछ की। इनमें शारदा के मीडिया ग्रुप के सीईओ और टीएमसी नेता कुणाल घोष, श्रृंजय बोस, मदन मित्रा, शंकुदेब पंडा, टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय और तपस पॉल शामिल हैं। कुणाल घोष, सृंजय बोस और मदन मित्रा की मामले में गिरफ्तारी भी हुई थी। पूर्व डीजीपी रजत मजूमदार भी आरोपियों में शामिल थे।

ममता के ट्रांसपोर्ट और खेल मंत्री मदन मित्रा भी घोटाले में घिरे।

ममता के ट्रांसपोर्ट और खेल मंत्री मदन मित्रा भी घोटाले में घिरे।

मुकुल रॉय और हिमंत बिस्वा सरमा का भी नाम आया
इस मामले में मुकुल रॉय से भी पूछताछ हुई थी। इनके अलावा असम के वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का नाम भी आया था। हिमंत की पत्नी से भी ईडी ने पूछताछ की थी। हिमंत तब कांग्रेस में थे। मुकुल रॉय और हिमंत बिस्वा सरमा ने घोटाले में नाम आने के बाद बीजेपी का रुख कर लिया था। उनके अलावा शंकुदेब पंडा भी 2019 में बीजेपी में शामिल हो गए थे। सृंजय बोस ने भी राजनीति से इस्तीफा दे दिया था। फिलहाल मुकुल रॉय भाजपा से वापस टीएमसी में चले गए हैं, वहीं सरमा असम में भाजपा के मुख्यमंत्री हैं।

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