Monday, September 20, 2021
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LNIPE से डिविजन, स्टेट के लिए खेलीं, डोप टेस्ट में पॉजिटिव आने पर 4 साल का बैन, बोलीं- समय आने पर बात करूंगी

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डोप टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद चार साल का बैन लगने वाली देश की पहली महिला क्रिकेटर अंशुला का ग्वालियर LNIPE में फोटो। - Dainik Bhaskar

डोप टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद चार साल का बैन लगने वाली देश की पहली महिला क्रिकेटर अंशुला का ग्वालियर LNIPE में फोटो।

​​​​​डोपिंग टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने वाली देश की पहली महिला क्रिकेटर बनी अंशुला राव का ग्वालियर से पुराना कनेक्शन है। ग्वालियर LNIPE (लक्ष्मीबाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन) में रहते हुए वह डिविजन क्रिकेट टीम में खेलीं। इसके बाद, यहीं से वह मध्य प्रदेश स्टेट टीम के लिए सिलेक्ट हुईं। डोप टेस्ट से पहले बिना बताए एक क्रिकेट मैच खेलने जाने पर उन्हें LNIPE से हटा दिया था।

पिछले एक साल से वह ग्वालियर में किसी भी टीम से नहीं खेली हैं। न ही यहां आई हैं। अंशुला से जब दैनिक भास्कर ने बात की, तो उन्होंने टेंशन में होने की बात कहते हुए कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। अशुंला का कहना है, उनके एडवोकेट ने अभी किसी से भी बात करने के लिए मना किया है। समय आने पर वह जरूर पक्ष रखेंगी।

डोप टेस्ट में पॉजिटिव आने पर 4 साल का लगा है बैन

मध्य प्रदेश स्टेट टीम की महिला क्रिकेटर अंशुला राव को डोप में पॉजिटिव पाए जाने के बाद चार साल के लिए बैन कर दिया गया है। घटना के साथ वह देश की पहली महिला क्रिकेटर बन गई हैं, जिन्हें डोप के लिए बैन लगाया गया है। सोमवार को नेशनल डोपिंग एजेंसी की डिसिप्लिनरी पैनल ने उन्हें प्रतिबंधित दवाओं एनाबॉलिक स्टेरॉयड ’19- नॉरएंड्रोस्टेरोन के सेवन का भी दोषी पाया। हालांकि अंशुला राव ने कहा था कि उन पर लगाए गए आरोप और डोप परीक्षण में चार महीने का अंतर है। अंशुला के दोनों सैंपल में प्रतिबंधित दवाई मिली है। ऐसे में अंशुला को बी-सैंपल का खर्च 2 लाख रुपए भी उठाना होगा।

होली के बाद 14 मार्च को हुआ था सैंपल

अंशुला राव का सैंपल बड़ौदा में होली के चार दिन बाद 14 मार्च 2020 को लिया गया था। वह डोप टेस्ट में फेल हो गई थी। उनके दोनों सैंपल बेल्जियम की लेबोरेटरी में भेजे गए। जांच में प्रतिबंधित दवा के नमूने मिले हैं।

2014-15 में बनारस से ग्वालियर आई थी अंशुला

LNIPE से पता लगा है, उत्तर प्रदेश के बनारस शहर के सामान्य परिवार की बेटी अंशुला राव वर्ष 2014-2015 में ग्वालियर आई थी। यहां LNIPE में उसने BP ED (बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन) में एडमिशन लिया था। यह चार साल का कोर्स होता है। इस महिला ऑल राउंडर का खेल इतना शार्प था, उसी साल यह ग्वालियर डिविजन टीम में सिलेक्ट हुईं और जमकर खेलीं। अच्छे खेल का इनाम मिला। 2015-16 में अंशुला का मध्य प्रदेश की अंडर-19 स्टेट टीम के लिए सिलेक्शन हो गया। यहां से वह स्टेट के लिए खेलीं। मार्च 2020 में स्टेट मैच के दौरान बडौदा में उनका डोप टेस्ट हुआ था।

खेल को लेकर जुनून की वजह से पढ़ाई छूटी

LNIPE में क्रिकेट कोच मधु शर्मा से पता लगा, अंशुला क्रिकेट को लेकर काफी जुनूनी थीं। यही कारण था कि चार साल की अपनी पढ़ाई के चौथे साल में बिना LNIPE को सूचना दिए वह खेलने चली गईं। उनकी इस गलती पर उसे LNIPE से हटा दिया गया। जिस कारण वह पढ़ाई यहां से पूरी नहीं कर सकी। कोच शर्मा बताती हैं कि वह खेलने में माहिर थी।

पढ़ाई ग्वालियर से इसलिए यहां से हुआ सिलेक्शन

अंशुला रहने वाली बनारस यूपी की रहने वाली थी, तो उनका ग्वालियर से डिविजन और MP स्टेट टीम में सिलेक्शन कैसे हो गया। कोच मधु शर्मा ने बताया, BCCI का नियम है कि कोई भी खिलाड़ी अपने गृह जिले से ही खेल सकता है, लेकिन यदि वह किसी अन्य स्टेट या शहर में पढ़ाई कर रहा है, तो उसे वहां का माना जाएगा। इसलिए उसका सिलेक्शन यहां से हुआ।

अंशुला बोली- एडवोकेट से मिलने के बाद बात करूंगी

महिला क्रिकेटर अंशुला ने बताया कि अभी उनके एडवोकेट ने किसी से भी बात करने से मना किया है, इसलिए वह आगे कुछ नहीं कह सकतीं। उनका कहना था, अभी कुछ नहीं कह सकती, लेकिन समय आने पर जरूर बात करूंगी।

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