Friday, July 30, 2021
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फेसबुक की गुहार- कंपनी की कोविड पॉलिसी के मुताबिक हम फिजिकली नहीं आ सकते; पैनल ने कहा- अफसरों को भेजिए, हम वैक्सीन लगवा देंगे

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नए IT नियमों को लेकर केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों पर सख्त रवैया अपना लिया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय स्थायी समिति ने शनिवार को फेसबुक की एक अर्जी पर जोरदार फटकार लगाई है।

दरअसल, फेसबुक के अधिकारियों ने कंपनी की कोविड पॉलिसी का हवाला देते हुए अगली पेशी में फिजिकली शामिल होने के बजाय वर्चुअली आने का अनुरोध किया। इस पर पैनल ने कहा है कि आप अपने अधिकारियों को भेज दीजिए, हम वैक्सीन लगवा देंगे।

फेसबुक ने क्या कहा..
फेसबुक ने कहा कि कंपनी के नियमों के मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर की अवधि के दौरान अधिकारियों को किसी भी मीटिंग में फिजिकली शामिल होने की मनाही है। मीटिंग वर्चुअली ही करने के निर्देश हैं, इसलिए समिति से अनुरोध है कि हमें वर्चुअली पेश होने की इजाजत दी जाए।

पैनल का करारा जवाब..
एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि, फेसबुक के इस तर्क पर संसदीय समिति ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, ‘कोई भी मीटिंग ऑनलाइन नहीं हो सकती। इसलिए फेसबुक के अधिकारियों को शारीरिक रूप से मौजूद होना होगा।’ इसके साथ ही समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने फेसबुक के उन अधिकारियों की सूची मांगी, जिन्हें कंपनी समिति के सामने भेजना चाहती है।

थरूर ने कहा कि समिति ऐसे अधिकारियों का वैक्सीनेशन करवाएगी और आने के लिए पर्याप्त समय भी देगी। संसदीय पैनल के फैसले पर फेसबुक के रुख के बारे में पूछे जाने पर कंपनी के अधिकारियों ने जवाब देने से इनकार कर दिया।

समिति ने यह भी कहा है कि गूगल, यूट्यूब, फेसबुक और अन्य कंपनियों को भी पैनल के सामने फिजिकली आना होगा। हालांकि, अभी इन कंपनियों को बुलाने को लेकर कोई निश्चित तारीख तय नहीं हो सकी है।

शुक्रवार को ट्विटर के अफसर पेश हुए थे
IT मिनिस्ट्री से जुड़ी संसदीय समिति के सामने शुक्रवार को ट्विटर के प्रतिनिधियों की पेशी हुई थी। कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अगुआई वाली संसदीय समिति ने ट्विटर को अपने प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के मुद्दे पर तलब किया था। ट्विटर इंडिया के लीगल विंग से आयुषी कपूर और पॉलिसी विंग की शगुफ्ता कामरान ने अपना पक्ष रखा था।

समिति ने कंपनी के अधिकारियों से पूछा कि क्या आप देश के कानून का पालन करते हैं? इस पर ट्विटर के प्रतिनिधियों ने कहा- हम अपनी पॉलिसी को फॉलो करते हैं, जो देश के कानून के अनुसार है। इस दलील पर समिति ने आपत्ति जताते हुए कंपनी से तल्ख लहजे में कहा कि हमारे यहां देश का कानून सबसे बड़ा है, आपकी पॉलिसी नहीं। समिति ने महत्वपूर्ण पॉलिसी पर निर्णय लेने के अधिकारों और कंपनी में चीफ कम्प्लायंस ऑफिसर की नियुक्ति को लेकर भी दोनों अफसरों से सवाल किए थे।

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