Tuesday, September 21, 2021
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तेजी से वजन घटाने के लिए 16 घंटे भूखे रहने के बाद भोजन का तरीका कारगर नहीं, पारंपरिक आहार ज्यादा फायदेमंद

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मैजिक पिल नहीं है इंटरमिटेंट फास्टिंग। - Dainik Bhaskar

मैजिक पिल नहीं है इंटरमिटेंट फास्टिंग।

वजन घटाने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग (तय अंतराल पर खाना) इन दिनों ट्रेंड में है। ट्विटर सीईओ जैक डॉर्सी, रीस वेदरस्पून और जेनिफर एनिस्टन जैसी हस्तियां इसका समर्थन कर चुकी हैं। पर ब्रिटेन में हुई स्टडी में दावा किया गया है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग में जब लंबे अंतराल के बाद आप भोजन करते हैं तो यह तरीका तेजी से वजन घटाने में कारगर नहीं है। इसे मैजिक पिल मानने की गलती नहीं करें।

ब्रिटेन की बाथ यूनिवर्सिटी में स्टडी के दौरान इंटरमिटेंट फास्टिंग करने वालों के वजन में ज्यादा कमी नहीं आई, जबकि पारंपरिक डाइट अपनाने वालों के वजन में कमी देखने को मिली। स्टडी के नेतृत्वकर्ता और यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर न्यूट्रिशन, एक्सरसाइज एंड मेटाबॉलिज्म के प्रमुख प्रो. जेम्स बेट्स के मुताबिक जो लोग तेजी से वजन घटाना चाहते हैं उनके लिए ट्रेडिशनल डाइट बेहतर विकल्प है। इस तरह की डाइट में निश्चित अवधि में कैलोरी की मात्रा को लगातार सीमित करना शामिल है।

5:2 इंटरमिटेंट फास्टिंग में हफ्ते में पांच दिन कैलोरी की चिंता किए बगैर खाते हैं, वहीं दो दिन 500-600 कैलोरी लेना होती है। 16:8 डाइट में दिन के 16 घंटे भूखे रहना होता है, सिर्फ 8 घंटे का वक्त खाने के लिए रहता है। प्रोफेसर बेट्स के मुताबिक घंटों उपवास रखते हुए खाने में मांसपेशियों और शारीरिक गतिविधियों का स्तर बनाए रखने में समस्या हो सकती है। ये लंबी अवधि में बेहतर सेहत के लिए महत्वपूर्ण कारक माने जाते हैं। स्टडी के दौरान पहले समूह को हर दूसरे दिन उपवास रखने को कहा गया, अगले दिन उन्हें उनकी सामान्य डाइट से 50% ज्यादा खाना दिया गया। दूसरे समूह को सिर्फ पारंपरिक डाइट पर रखा गया। इसमें कैलोरी की मात्रा 25% तक कम रखी गई। तीसरे समूह को पहले समूह की तरह एक दिन छोड़कर भूखे रहना था पर अगले दिन 100% ज्यादा खाना दिया गया। तीन हफ्ते बाद नतीजे चौंकाने वाले थे। पहले समूह ने 1.6 किलो वजन घटाया जबकि दूसरे समूह ने (ट्रेडिशनल डाइट) करीब 2 किलो तक वजन कम किया। जबकि तीसरे समूह के वजन में कोई खास अंतर नहीं नजर आया।

पारंपरिक आहार में कम कैलोरी पर ध्यान दिया जाता है: एक्सपर्ट्स

इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान ज्यादा फाइबर वाले आहार जैसे ड्रायफ्रूट, फलियां, सब्जियां वहीं उच्च प्रोटीन वाला खाना जिनमें मछली, मीट, टोफू और बहुत सारा पानी रहता है। जबकि भारत के जाने-माने डायटिशियन के मुताबिक पारंपरिक खानपान में नाश्ते में इडली, पोहा, उपमा वहीं लंच में ताजी सब्जियों का सलाद, दही, दाल पालक या सांबर, रसम मल्टीग्रेन रोटी और चावल शामिल रहता है। डिनर में ताजी सब्जियां, मेथी दाल, सांबर या रसम, मल्टीग्रेन रोटी और छाछ लेने की सलाह दी जाती है।

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