Friday, July 30, 2021
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2009 की रोम संगोष्ठी में पुर्तगाल के योगाचार्य ने पहली बार रखा 21 जून को विश्व योग दिवस का प्रस्ताव

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ग्लोबल योग एलायंस के अध्यक्ष डॉ. गोपाल। - Dainik Bhaskar

ग्लोबल योग एलायंस के अध्यक्ष डॉ. गोपाल।

  • अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के जन्म की कहानी बता रहे हैं इस प्रक्रिया को शुरू करने वाले ग्लोबल योग अलायंस के अध्यक्ष डॉ. गोपाल
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मदद के बिना पूरा नहीं होता संकल्प

हम सभी जानते हैं कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के समक्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव रखा था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 21 जून को विश्व योग दिवस का विचार पहली बार कब अंतरराष्ट्रीय पटल पर आया। कैसे यह बात पीएम नरेंद्र मोदी तक पहुंची। इस पूरी प्रक्रिया से करीब से जुड़े ग्लोबल योग एलायंस के अध्यक्ष डॉ. गोपाल बता रहे हैं भारतीय संस्कृति की इस अंतरराष्ट्रीय पहचान की पूरी कहानी…

वर्ष 2009 में इटली के योग गुरु स्वामी शिवानंद सरस्वती ने रोम में योग गुरुओं की एक संगोष्ठी आयोजित की। इसमें भारत के अलावा पुर्तगाल, अर्जेंटीना समेत 12 देशों के डेलिगेशन आए। संगोष्ठी में शरीक हुए भारतीय योग कंफेडरेशन के डेलिगेशन का मैं अध्यक्ष था। खास बात ये थी कि इस संगोष्ठी में हर धर्म की सहभागिता थी।

अध्यक्षता जगतगुरु शंकराचार्य प्रयाग पीठ स्वामी ओंकारानंद कर रहे थे। यहां पर पुर्तगाल के योग गुरु अमृत सूर्यानंद ने प्रस्ताव रखा कि संयुक्त राष्ट्र से बात की जाए कि विश्व में हर साल 21 जून को योग दिवस मनाया जाए। हम सबका पहला प्रश्न था कि 21 जून को ही क्यों? सूर्यानंद पूरा होमवर्क करके आए थे।

उन्होंने बताया कि यूएन के कैलेंडर में 21 जून खाली है। यदि यूएन कैलेंडर में स्थान न हो तो दिन तय करने से कोई लाभ नहीं। कैलेंडर में खाली इस तारीख के साथ संयोग यह भी था कि यह साल का सबसे लंबा दिन है। योग का उद्देश्य भी व्यक्ति के जीवन को लंबा करना है।

सर्वसहमति से प्रस्ताव स्वीकार हुआ व ग्लोबल योग अलायंस के नाम से संगठन बना। इस मुहिम में भारत की भूमिका को देखते हुए मुझे इसका अध्यक्ष चुना गया। प्रतीक के तौर पर 12 देशों ने 2009 में ही 21 जून को योग दिवस मनाया। यह एक वार्षिक आयोजन बन गया। 2012 की संगोष्ठी में स्वामी अवधेशानंद, परमात्मानंद और डॉ. नागेंद्र जैसे प्रबुद्धजन शामिल हुए।

इसी वर्ष श्री श्री रविशंकर व बाबा रामदेव भी इस मुहिम से जुड़े। तब तक हम यह समझ चुके थे कि बिना राजनीतिक सहयोग के संयुक्त राष्ट्र के मंच पर बात उठाना मुश्किल है। हमने तत्कालीन सरकार के सामने प्रस्ताव रखा था, मगर तब सरकार उदासीन दिखी। 2013 में हम गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले।

उस समय उनका नाम राष्ट्रीय पटल पर तेजी से उभर रहा था। मुलाकात में जब हमने प्रस्ताव के बारे में बताया तो उनका भी पहला प्रश्न था विश्व योग दिवस 21 जून को ही क्यों मनाया जाए। जब हमने कारण बताए तो वह बहुत प्रभावित हुए। आश्वासन दिया कि यदि जनता ने उनकी पार्टी को देश की सेवा का मौका दिया तो वह अवश्य इस प्रस्ताव पर काम करेंगे।

प्रसन्नता की बात ये है कि मोदी जी ने प्रधानमंत्री बनते ही पहले यूएन असेंबली में प्रस्ताव रख दिया। 4 महीने में ही स्वीकृति प्राप्त कर ली। 2015 से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाने लगा। 26 जनवरी 2015 को ही भारत सरकार ने सदगुरू अमृत सूर्यानंद को पद्मश्री से सम्मानित किया। वे यह सम्मान पाने वाले पहले पुर्तगाली नागरिक बने। मुझे लगता है कि अगर अमृत सूर्यानंद नहीं होते तो अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की परिकल्पना नहीं होती। और अगर पीएम मोदी नहीं होते तो यूएन में सफलता नहीं मिल पाती।

  • डॉ. गोपाल भारत सरकार के यूथ अफेयर्स व स्पोर्ट्स मंत्रालय में अधिकारी रहे। एनएसएस के एडवाइजर पद से रिटायर हुए। यहां दिया गया वृतांत दैनिक भास्कर के रितेश शुक्ल से बातचीत के आधार पर है।

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