Tuesday, September 21, 2021
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जून तिमाही में 12% घट सकती है GDP, लेकिन इस वित्त वर्ष में 9.5% रह सकती है ग्रोथ

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  • GDP May Decrease By 12 Percent In The June Quarter, Growth May Remain At 9.5 Percent In This Financial Year
  • CII के मुताबिक, दूसरी लहर के बाद GDP ग्रोथ में तेज रिकवरी होने के संकेत, 2024-25 में 9% तक रह सकती है आर्थिक वृद्धि दर
  • सरकार को एक साथ दो कदम उठाने की जरूरत, मांग टिकाऊ होने तक खपत बढ़ाने और इंडस्ट्री को सपोर्ट देने पर ध्यान देना होगा

प्रमुख उद्योग चैंबर CII ने वित्त वर्ष 2021-22 में आर्थिक वृद्धि दर 9.5% रहने का अनुमान दिया है। उसके मुताबिक, अल्ट्रा हाई फ्रिक्वेंसी इंडिकेटर कोविड की दूसरी लहर के बाद GDP ग्रोथ में तेज रिकवरी होने के संकेत दे रहे हैं।

इस वित्त वर्ष में ग्रोथ रेट 9.5% रह सकता है

मोबिलिटी इंडिकेटर, यातायात से जुड़े इंडेक्स और दैनिक रेल यात्रा में बढ़ोतरी के हिसाब से इस वित्त वर्ष में ग्रोथ रेट 9.5% रह सकता है। यह बात 31 मई को CII के प्रेसिडेंट का पद भार संभालने वाले टाटा स्टील के एमडी टी वी नरेंद्रन ने कही है।

जून तिमाही में GDP 12% घटने का अनुमान

इधर, स्विस ब्रोकरेज फर्म UBS सिक्योरिटीज ने जून तिमाही में जीडीपी 12% घटने का अनुमान दिया है। उसके मुताबिक, यह दूसरी लहर के दौरान अप्रैल और मई में किए गए लॉकडाउन से हुआ है। पिछले साल इसी तिमाही में जीडीपी में 23.9% की कमी आई थी।

2024-25 तक वृद्धि दर 9% पर पहुंच सकती है

नरेंद्रन के मुताबिक, सरकार की तरफ से किए जा रहे खर्च और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाले सुधारों और टीकाकरण अभियान से 2024-25 तक आर्थिक वृद्धि दर 9% पर पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि कोविड के चलते घर-परिवारों की मांग में कुछ समय के लिए कमी आ सकती है। असल में लोगों की आमदनी और खरीदारी की इच्छा में कमी आई है और दूसरी लहर से मेडिकल खर्च बढ़ा है।

खपत बढ़ाने और इंडस्ट्री को सपोर्ट देना जरूरी

CII के प्रेसिडेंट ने कहा है कि दूसरी लहर के बाद शुरू हो रही अनलॉकिंग के बीच सरकार को एक साथ दो कदम उठाने की जरूरत है। मांग के टिकाऊ बनने तक सरकार को खपत बढ़ाने और इंडस्ट्री को सपोर्ट देने पर ध्यान देना होगा।

MNREGA के लिए आवंटन बढ़ाने का उपाय

उन्होंने यह भी कहा कि इकोनॉमी को सपोर्ट देने के लिए सरकार के पास 3 लाख करोड़ रुपए तक का राहत कार्य करने की गुंजाइश है। यह रकम समाज के कमजोर तबके के लोगों को डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के जरिए पहुंचाया जा सकता है। इसके अलावा MNREGA के लिए आवंटन बढ़ाया जा सकता है, GST में कुछ समय के लिए कटौती की जा सकती है।

पहली तिमाही में नहीं हो पाएगी V शेप रिकवरी

UBS सिक्योरिटीज के मुताबिक, पिछले साल लॉकडाउन उठने पर इकोनॉमी में जो V शेप रिकवरी हुई थी, वो पहली तिमाही में GDP में 12% की संभावित कमी के चलते इस बार नहीं हो पाएगी। वैसे भी इस बार लोग खरीदारी को लेकर ज्यादा उत्साहित नजर नहीं आ रहे हैं, क्योंकि उनको महामारी को लेकर पिछली बार से ज्यादा फिक्र हो रही है।

इस बार इकोनॉमी में धीरे-धीरे रिकवरी होगी

ब्रोकरेज फर्म की अर्थशास्त्री तन्वी जैन के मुताबिक, इकोनॉमिक ग्रोथ दूसरी छमाही में ही पटरी पर लौट पाएगी। इसके अलावा पिछले साल की V शेप रिकवरी के उलट इस बार इकोनॉमी में धीरे-धीरे रिकवरी होगी।

दूसरी छमाही से रिकवरी में तेजी आएगी

जैन ने कहा कि महामारी से जुड़ी चिंताएं दूर नहीं हुई हैं, इसलिए लोगों की खरीदारी का रुझान कमजोर हुआ है। टीकाकरण में तेजी आने और कोविड संक्रमण पर लगाम लगने से कंज्यूमर और बिजनेस कॉन्फिडेंस बेहतर होगा। ऐसे में दूसरी छमाही से इकोनॉमिक रिकवरी में तेजी आएगी।

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