Monday, August 2, 2021
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इमरान खान ने ब्रिटेन से मांगी भारत जैसी सुविधा, बोरिस जॉनसन के मना करने पर UK की विजिट को आगे बढ़ाया

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने जुलाई में होने वाले अपने ब्रिटेन के दौरे को आगे बढ़ा दिया है। ऐसा पाकिस्तान ने इसलिए किया है, क्योंकि ब्रिटेन ने पाकिस्तान के साथ उस तरह की डील करने से इनकार कर दिया था, जो उन्होंने भारत के साथ की हैं। इमरान की विजिट में दोनों देशों के बीच एक फ्रेंडली क्रिकेट मैच होना था।

हालांकि, पाकिस्तान ने विजिट को आगे बढ़ाने का कारण आंतरिक सुरक्षा को बताया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स से साफ हो रहा है कि भारत जैसा 10 साल का पैक्ट साइन न होने के कारण विजिट आगे बढ़ाई गई है।

भारत-ब्रिटेन की व्यापारिक साझेदारी बढ़ेगी
भारत और ब्रिटेन ने पिछले महीने स्ट्रैटेजिक पार्टनशिप एग्रीमेंट साइन किया था। इसके मुताबिक 2030 तक दोनों देश के बीच होने वाले व्यापार को बढ़ाकर दोगुना किया जाएगा। इसमें डिफेंस सेक्टर भी शामिल रहेगा।

बोरिस जॉनसन ने दिया था इमरान को न्योता
बोरिस जॉनसन ने 7 जून को इमरान खान से फोन पर बात की थी और उन्हें ब्रिटेन आने का न्योता दिया था। इमरान खान के दौरे ब्रिटेन ने क्रिकेट फ्रेंडली टूर बनाने की बात कही थी, लेकिन पाकिस्तान की तरफ से भारत की तरह कई डील्स करने को कहा गया। पाकिस्तान ने ब्रिटेन से कहा था कि यदि इमरान खान की विजिट में कोई डील साइन नहीं होती है तो दौरे पर सवाल उठेंगे।

पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर होने की उम्मीद
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की मीटिंग 21 को शुरू हो चुकी है। पाकिस्तान 3 साल से इस संगठन की ग्रे लिस्ट में है। उसे उम्मीद है कि इस बार वो ग्रे लिस्ट से निकल जाएगा और दिवालिया होने की कगार पर खड़ी इकोनॉमी दुनिया की मदद से पटरी पर आ जाएगी। वहीं, अमेरिका और फ्रांस जैसे कई देशों को आशंका है कि अगर पाकिस्तान ग्रे लिस्ट से बाहर आ गया, उसे पाबंदियों से राहत मिल गई तो इसका फायदा वहां मौजूद आतंकी संगठन उठा सकते हैं।

सबूत देना सबसे मुश्किल काम
FATF में कुल 37 देश और 2 क्षेत्रीय संगठन हैं। 21 से 25 जून के बीच किसी भी दिन पाकिस्तान की किस्मत का फैसला हो सकता है। इस दौरान वोटिंग होगी। अगर पाकिस्तान को ग्रे से व्हाइट लिस्ट में आना है तो उसे कम से कम 12 सदस्य देशों के वोट चाहिए होंगे।

पाकिस्तान को 27 शर्तें पूरी करनी थीं। 24 को लेकर ज्यादा परेशानी नहीं थी, क्योंकि इन पर अमल मुश्किल नहीं है। 3 को लेकर पेंच फंसा है। इनका सार ये है कि पाकिस्तान को सिर्फ कार्रवाई ही नहीं करनी है, बल्कि इसके बिल्कुल पुख्ता सबूत सदस्य देशों को दिखाना हैं। फरवरी में भी वो ये नहीं कर पाया था और इस बार भी उम्मीद बहुत कम है।

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