Tuesday, September 21, 2021
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राज्यों में प्रतिबंध हटने से जून में बढ़ी आर्थिक गतिविधियां, ज्यादा वैक्सीनेशन से ग्रोथ को रफ्तार मिलेगी

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कोविड संक्रमण की मार झेल रही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर आई है। कोरोना के केसों में कमी और राज्यों में प्रतिबंध हटने से जून में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने लगी हैं। तीन प्रमुख रिसर्च एजेंसियों के साप्ताहिक डाटा के अनुसार, 13 जून को समाप्त हुए सप्ताह में आर्थिक गतिविधियों में लगातार तीसरे सप्ताह सुधार रहा है। इसके अलावा उपभोक्ताओं के सेंटिमेंट में भी सुधार हो रहा है।

क्या कहते हैं प्रमुख इंडिकेटर?

  • UBS इंडिया एक्टिविटी इंडिकेटर 13 जून को समाप्त हुए सप्ताह में उच्च स्तर पर पहुंच गया है। कोरोना के केसों में बढ़ोतरी के साथ 23 मई को समाप्त हुए सप्ताह में यह निचले स्तर पर पहुंच गया था।
  • इसी तरह से क्वांटइको रिसर्च का डेली एक्टिविटी एंड रिकवरी ट्रैकर (DART) संकेत देता है कि 23 जून को समाप्त हुए सप्ताह में आर्थिक गतिविधियों में लगातार चौथे सप्ताह सुधार हुआ है।
  • मोबिलिटी इंडिकेटर्स और बिजली की ज्यादा डिमांड के कारण नोमुरा का बिजनेस रिजम्पशन इंडेक्स लगातार तीसरे सप्ताह आर्थिक गतिविधियों में सुधार का संकेत देता है। 23 मई को समाप्त हुए सप्ताह में नोमुरा का बिजनेस इंडेक्स 1 साल के निम्न स्तर पर पहुंच गया था।

ई-वे बिल और इंपोर्ट में भी रहा सुधार

मोबिलिटी इंडिकेटर जैसे गूगल मोबिलिटी इंडिसीज, ऐपल ड्राइविंग इंडेक्स और रेल यात्रियों का दैनिक रेवेन्यू भी जून में मजबूत रिकवरी का संकेत देते हैं। जून के पहले 15 दिनों में ई-वे बिल और इंपोर्ट में बढ़ोतरी भी आर्थिक गतिविधियों में लगातार सुधार का संकेत दे रहे हैं।

कमजोर उपभोक्ता सेंटिमेंट के कारण धीरे-धीरे होगी रिकवरी: जैन

UBS की इकोनॉमिस्ट तन्वी गुप्ता जैन का कहना है कि हम जून से आर्थिक गतिविधियों में क्रमिक रूप से तेजी की उम्मीद कर रहे हैं। 2020 की वी-शेप रिकवरी के विपरीत, हम भारत की धीरे-धीरे रिकवरी की उम्मीद कर रहे हैं। उपभोक्ताओं का कमजोर सेंटिमेंट इसका प्रमुख कारण है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि वित्त वर्ष 2022 की दूसरी छमाही से इकोनॉमिक रिकवरी रफ्तार पकड़ेगी। तब तक उपभोक्ता और बिजनेस कॉन्फिडेंस में सुधार हो जाएगा। इसके अलावा वैक्सीनेशन रफ्तार पकड़ेगी और महामारी काबू में होगी।

वैक्सीनेशन में तेजी रिकवरी की राह पर आएगी अर्थव्यवस्था

कोविड-19 के खिलाफ वैक्सीनेशन में तेजी से अर्थव्यवस्था रिकवरी की राह पर आ पाएगी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ताजा बुलेटिन में एक आर्टिकल में यह बात कही गई है। ‘स्टेट ऑफ द इकोनॉमी’ नाम से इस आर्टिकल को डिप्टी गवर्नर एमडी पात्रा और RBI के अन्य अधिकारियों ने लिखा है। इस आर्टिकल में लिखा है,” मौजूदा असेसमेंट यह है कि कोविड की दूसरी लहर का घरेलू मांग पर प्रमुख असर पड़ा है।”

हमें कोरोना के साथ जीना सीखना होगा

आर्टिकल में कहा गया है कि वैक्सीन से अपने आप महामारी समाप्त नहीं होगी। हमें कोरोना वायरस के साथ जीना सीखना होगा। वैक्सीन के साथ हेल्थकेयर, लॉजिस्टिक्स और रिसर्च में निवेश बढ़ाना होगा। कोरोना महामारी वास्तविक परिणामों के साथ एक वास्तविक झटका है। इसलिए, हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि बिजनेस इन्वेस्टमेंट और उत्पादकता ग्रोथ की ठोस नींव बनी रहे। आर्टिकल में कहा गया है कि यह लेखकों के अपने विचार हैं। RBI का इनसे सहमत होना जरूरी नहीं है।

कृषि और कॉन्टैक्टलेस सेवाओं में सुधार रहा

अच्छी बात यह है कि कृषि और कॉन्टैक्सलेस सेवाओं में सुधार रहा है। जबकि महामारी प्रोटोकॉल के साथ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट बढ़ रहा है। आर्टिकल में कहा गया है कि वैक्सीनेशन में तेजी से ही रिकवरी की राह बनेगी। अर्थव्यवस्था में लचीलापन और बुनियादी आर्टिकल्स मौजूद हैं जो महामारी से वापस लौटने में आने वाली बाधाओं को मुक्त कर सकते हैं।

प्री-कोविड से ज्यादा ग्रोथ रहने की उम्मीद

चालू तिमाही में प्री-कोविड से ज्यादा ग्रोथ रहने की उम्मीद जताई जा रही है। RBI ने हाल ही आयोजित मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद कहा था कि वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून तिमाही में रियल जीडीपी ग्रोथ 18.5% रह सकती है। कोरोना महामारी के कारण अप्रैल-जून 2020 तिमाही में ग्रोथ -23.9% पर आ गई थी। इससे पहले अप्रैल-जून 2019 में जीडीपी ग्रोथ 5% रही थी। RBI ने चालू वित्त वर्ष में रियल जीडीपी ग्रोथ 9.5% रहने का अनुमान जताया है।

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