Monday, August 2, 2021
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भारत में बारिश कम होने से जीडीपी पर 20% असर पड़ता है, एक तिहाई आर्थिक विकास प्रभावित

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स्काईमैट के प्रमुख योगेश पाटिल की भविष्यवाणी है कि मानसून अपने नियत समय 8 जुलाई तक पूरे देश में पहुंच जाएगा। - Dainik Bhaskar

स्काईमैट के प्रमुख योगेश पाटिल की भविष्यवाणी है कि मानसून अपने नियत समय 8 जुलाई तक पूरे देश में पहुंच जाएगा।

भारत सहित दक्षिण एशिया के कुछ देशों में मानसून का आगमन खुशियां बिखेर देता है। केवल चार माह में साल की 70% से अधिक वर्षा हो जाती है। फसलों को पनपने का मौका मिलता है। भारत में आधे रोजगार खेती से जुड़े हैं। जीडीपी में उसका हिस्सा 20% है। खराब मानसून से एक तिहाई आर्थिक विकास प्रभावित होता है। वैसे, दो दिन की देर से केरल में आए मानसून ने अब तक अच्छी बढ़त बनाई है। स्काईमैट के प्रमुख योगेश पाटिल की भविष्यवाणी है कि मानसून अपने नियत समय 8 जुलाई तक पूरे देश में पहुंच जाएगा।

मानसून के दौरान कहीं भारी वर्षा होती है तो कहीं सूखा पड़ता है। मानसून पर लिखने वाले आंध्रप्रदेश के एस अनंत कहते हैं,इस साल केवल एक बार झमाझम बारिश हुई है। कुछ हल्की फुहारें भी पड़ी हैं। अनंत के दादा कहते थे कि मई में चक्रवात आने पर मानसून कमजोर पड़ जाता है। ध्यान रहे, इस बार मई में बंगाल की खाड़ी में तूफान आया था। इस कारण किसान चिंतित हैं।

दूसरी ओर जलवायु परिवर्तन के कारण लंबी अवधि में मानसून पर खतरा मंडरा रहा है। जलवायु रिसर्च पोट्सडैम इंस्टीट्यूट के अंजा काटजेनबर्गर की अगुआई में ताजा विश्लेषण से पता लगा है कि धरती के तापमान में एक डिग्री की बढ़ोतरी पर 5% अधिक बारिश हो रही है। भारी वर्षा के दौर बढ़ रहे हैं।

धूल के कण, गैसों के उत्सर्जन और पराली जलने से उत्तर भारत के मैदानी इलाके सूर्य की रोशनी अधिक सोखते हैं। इससे मानसून प्रभावित होता है। कंसास यूनिवर्सिटी के क्विनजिन और उनकी टीम के एक रिसर्च पेपर का तर्क है कि एशिया की धूल हवा गर्म करती है। इससे मानसून में अधिक गर्मी पड़ती है। ज्यादा पानी गिरता है।

पेचीदा हलचल
भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और पाकिस्तान में भी दक्षिण एशियाई मानसून आता है। यह एक अरब 80 करोड़ लोगों को प्रभावित करता है। उसकी हलचल पेचीदा है। गर्मियों का मानसून समुद्र से उठने वाली हवाओं के आधार पर चलता है। भारतीय उपमहाद्वीप में गर्मी के दौरान गर्म हवा ऊपर उठती है। यह हिंद महासागर की नमी वाली हवाओं को खींचती है। इसके ऊपर जाने और ठंडे होने पर पानी गिरता है। उत्तर में हिमालय पर्वत इस प्रभाव को और अधिक बढ़ाता है।

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