Sunday, August 1, 2021
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टकराव के मुद्दे ज्यादा और बड़े, सहयोग के मामले कम; डिप्लोमेटिक रिलेशन में सुधार की बड़ी उम्मीद

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अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद जो बाइडेन पहली बार आज रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन से मुलाकात करेंगे। स्विटजरलैंड के जिनेवा में होने वाली इस बातचीत पर दुनियाभर की नजरें टिकी हैं। दोनों देशों के बीच हालिया रिश्तों में सख्त तल्खी साफ देखी जा सकती है। बाइडेन के पास आरोपों का अंबार होगा तो पुतिन भी जानते हैं कि अमेरिका महामारी के दौर में रूस और चीन की चुनौतियों का एक साथ मुकाबला करने की हालत में नहीं है। रिश्ते किस हद तक खराब हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दोनों देशों में एक दूसरे के एम्बेसडर तक नहीं हैं।

सिक्योरिटी अरेंजमेंट्स
दोनों देशों के सीक्रेट एजेंट्स काफी पहले ही जिनेवा पहुंच चुके हैं। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस किया जा रहा है। इसके अलावा ड्रोन और स्पायजेट्स भी आसमान पर निगरानी रखेंगे। जमीनी सुरक्षा की बात करें तो करीब 3 हजार पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे।

रिश्ते क्यों बिगड़े?
शुरुआत 2014 में हुई। तब रूस ने ताकत के बल पर क्रीमिया पर कब्जे की कोशिश की। फिर 2016 में जब अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हुए तो अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने आरोप लगाया कि रूस डोनाल्ड ट्रम्प और रिपब्लिकन पार्टी की मदद कर रहा है। इसके बाद रूस की खुफिया एजेंसियों पर आरोप ये भी लगे कि वो चीन के साथ मिलकर अमेरिका की अहम कंपनियों का डेटा चुराने की कोशिश कर रहा है। रूस ने इन तमाम आरोपों को नकार दिया। खास बात ये भी है कि अमेरिका ने कभी सबूत पेश नहीं किए। अमेरिका चाहता है कि पुतिन सरकार लोकतंत्र समर्थक नेता एलेक्सी नेवेल्नी को रिहा करे। रूस इसे आंतरिक मामलों में दखलंदाजी बताता है।

बयान ने बढ़ाई दूरियां
बाइडेन ने मार्च में ABC न्यूज को एक इंटरव्यू दिया। इसमें पुतिन को हत्यारा कहा। इस पर पुतिन ने बाइडेन को खुली डिबेट के लिए चैलेंज किया। रूस ने अमेरिका को ‘अनफ्रेंडली कंट्री’ लिस्ट में डाल दिया। बाइडेन ने अप्रैल में पुतिन को फोन किया और बातचीत का न्योता दिया। इसके बाद यह मुलाकात हो रही है।

टकराव के 3 बड़े मुद्दे

  • मानवाधिकार : बाइडेन चाहते हैं कि पुतिन लोकतंत्र समर्थक नेता एलेक्सी नेवेल्नी को रिहा करें। उनकी पार्टी पर से प्रतिबंध हटाएं। मीडिया को आजादी दें। राजनीतिक कैदियों की रिहाई हो। दो अमेरिकी नागरिकों पॉल वेह्लेन (16 साल की सजा) और ट्रेवर रीड (9 साल की सजा) को रिहा किया जाए। बदले में रूस अपने दो नागरिकों को छोड़ने की मांग कर रहा है। इनमें से एक आर्म्स तो दूसरा ड्रग स्मगलर है।
  • डिप्लोमेसी : मार्च में जब बाइडेन ने पुतिन को ‘किलर’ कहा तो रूस ने वॉशिंगटन से अपने एम्बेसडर को वापस बुला लिया। कुछ दिन बाद मॉस्को ने अमेरिकी एम्बेसडर जॉन सुलिवान को देश छोड़ने के आदेश दिए। कई और अफसरों को दोनों देशों ने निकाला। अब इस तनातनी की जद में मल्टीनेशनल कंपनियां भी आ गई हैं। माना जा रहा है कि बाइडेन-पुतिन मुलाकात में यह मुद्दा तो हल हो ही जाएगा।
  • चीन : अमेरिका चाहता है कि रूस अब चीन पर ये दबाव डाले कि वो कोरोना ओरिजिन पर सबूत और मेडिकल डॉक्यूमेंट्स साझा करे। इसके अलावा हॉन्गकॉन्ग, ताइवान और दक्षिण चीन सागर में चीन की हरकतों को रोके। रूस ने अब तक कोरोना ओरिजिन पर चीन के पक्ष में ही दलीलें दी हैं। अमेरिका यह भी चाहता है कि ईरान के एटमी प्रोग्राम को रोकने के लिए रूस उसकी पहल का हिस्सा बने, लेकिन लगता नहीं कि बाइडेन को इस मामले पर कामयाबी मिलेगी, क्योंकि रूस अपने हित देख रहा है।

जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं होगी?
इस बात पर सबको हैरानी है कि मीटिंग के बाद दोनों नेता एक साथ न आकर अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। ‘मॉस्को टाइम्स’ के मुताबिक- इसकी वजह यह है कि दोनों नेता सीधी बात करना चाहते हैं और अपना पक्ष विस्तार से रखना चाहते हैं। पहली मुलाकात से कोई गलत संदेश न जाए, इसीलिए यह व्यवस्था की गई है। बाइडेन दुनियाभर के मीडिया के सवालों के जवाब देंगे। पुतिन सिर्फ रूस की मीडिया से बात करेंगे।

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