Monday, August 2, 2021
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लता मंगेशकर ने यंग जनरेशन को दी टिप्स, कहा- अपनी खुद की आवाज खोजें..इंडियन क्लासिकल म्यूजिक सीखें, रागों को जानें और अभ्यास करें

बॉलीवुड की स्वरकोकिला लता मंगेशकर ने अपनी शानदार आवाज से लंबे समय तक दर्शकों के दिलों को जीता है। उनकी खूबसूरत आवाज के दुनिया भर में दीवाने हैं। बॉलीवुड सहित देश की सभी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी आवाज का जादू बिखेरने वाली लताजी ने विश्व संगीत दिवस के मौके पर यंग जनरेशन को दी टिप्स और कहा कि अपनी खुद की आवाज खोजें। इंडियन क्लासिकल म्यूजिक सीखें, रागों को जानें और अभ्यास करें।

13 साल उम्र में लताजी के पिता का हो गया था देहांत

लताजी कहती हैं, “मेरा संघर्ष मेरे लिए नहीं था। यह मेरे परिवार के लिए था। मैं बहुत छोटी थी, केवल 13 साल की थी जब मेरे पिता का देहांत हो गया था। घर के सबसे बड़े बच्चे होने की वजह से मेरी तीन बहनों और एक भाई की देखभाल की जिम्मेदारी मुझ पर आ गई थी। चूंकि मुझे सिर्फ गाना गाने ही आता था, इसलिए मैं अपनी कॉटन साड़ी और चप्पल में पूरे मुंबई के रिकॉर्डिंग स्टूडियो में जाती थी, कभी-कभी तो खाली पेट शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक ट्रेन से ट्रैवल करती थी। नौशाद साहब और सज्जाद हुसैन साब जैसे दयालु कंपोजर्स मुझे लंच औफर करते थे।”

लताजी ने बताया कि पहले के समय में लाइव रिकॉर्डिंग होती थीं

लताजी ने आगे कहा, “अगर आपने कठिनाइयां नहीं देखी हैं, तो आप कैसे दर्द को लेकर गाने गा सकते हो? आज की जनरेशन के लिए यह पहले से आसान हो गया है। गाने कंप्यूटर्स पर रिकॉर्ड किए जाते हैं। हमारे समय में लाइव रिकॉर्डिंग में 100 से अधिक ऑर्केस्ट्रा के लोग लाइव इंस्ट्रूमेंट्स बजाते थे। जब रफी साहब और मैं, किशोरदा और मैं डूएट गाते थे, तो हम एक ही माइक शेयर करते थे। आजकल दो कॉन्टिनेंट से डूएट रिकॉरड किए जाते हैं। भावनाएं गायब हो रही हैं।”

लताजी को रियाज को नजरअंदाज करने का है अफसोस

लताजी रीमिक्स कल्चर के सख्त खिलाफ हैं और इस बारे में बात करते हुए कहती हैं, “रफी साब, किशोर दा, आशा या मेरी नकल करना शुरूआत करने के लिए ठीक है। लेकिन आपको जल्द से जल्द अपनी आवाज ढूंढनी होगी। यही कारण है कि पुराने क्लासिक्स के कवर वर्जन्स की सलह नहीं दी जाती है। एक नकल, एक नकल होती है। यह आपको कहीं जाने लायक नहीं ले जा सकती है। अपनी खुद की आवाज खोजें। इंडियन क्लासिकल म्यूजिक सीखें, रागों को जानें और अभ्यास करें…हर एक दिन रियाज करें। दुर्भाग्यवश मैं इतनी व्यस्त हो गई की मैंने अपने रियाज को नजरअंदाज कर दिया। एक सिंगर के रूप में मुझे यही एक अफसोस है। काश मैंने हर दिन अपने रियाज के लिए समय निकाला होता। युवा गायकों को मेरी यही सलाह है कि अपनी आवाज को मंदिर की तरह मानों।”

लताजी को दादासाहेब फाल्के अवार्ड से नवाजा जा चुका है

लता मंगेशकर 91 साल की हैं। उनका जन्म 28 सितंबर 1929 को मध्यप्रदेश के इंदौर में हुआ था। उन्होंने अपनी गायकी से देश के साथ-साथ दुनिया में भी लोगों का दिल जीता है। लताजी को गायिकी के क्षेत्र में अमूल्य योगदान देने के लिए भारत रत्न, पद्म विभुषण, पद्म भूषण और दादासाहेब फाल्के अवार्ड जैसे कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

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