Monday, August 2, 2021
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SC ने कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, कहा- बंगाल सीएम और कानून मंत्री से फिर से आवेदन करें

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नारदा केस में ममता बनर्जी को पक्षकार बनाया गया था। इसके बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता के हलफनामा दायर करने पर रोक लगा दी थी, जिसे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। -फाइल फोटो - Dainik Bhaskar

नारदा केस में ममता बनर्जी को पक्षकार बनाया गया था। इसके बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता के हलफनामा दायर करने पर रोक लगा दी थी, जिसे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। -फाइल फोटो

नारदा स्टिंग केस में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के कानून मंत्री मलय घटक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर उन्हें राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने ममता और मलय को दोबारा कलकत्ता हाईकोर्ट में आवेदन करने को कहा है। साथ ही कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए ममता और मलय की याचिका पर दोबारा विचार करने को कहा है।

दरअसल, 2016 में बंगाल में असेंबली इलेक्शन से पहले नारदा न्यूज पोर्टल ने कुछ टेप जारी किए गए थे। इस स्टिंग ऑपरेशन के बाद दावा किया गया कि टेप 2014 में रिकॉर्ड किए गए हैं। टेप के हवाले से तृणमूल के मंत्री, सांसद और विधायकों पर डमी कंपनियों से कैश लेने के आरोप लगाए गए थे। कलकत्ता हाईकोर्ट में ये मामला पहुंचा था। हाईकोर्ट ने 2017 में इसकी CBI जांच के आदेश दिए थे।

हाईकोर्ट ने ममता के हलफनामा दायर करने से रोका
इस मामले में तृणमूल कांग्रेस के 4 नेताओं को गिरफ्तार किया गया था। इसी मामले में ममता बनर्जी CBI दफ्तर पहुंची थीं। उन्हें इस मामले में पक्षकार बनाया गया था। इसके बाद ही कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता के हलफनामा दायर करने पर रोक लगा दी। बंगाल सीएम ने इसको सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता 28 जून तक हाईकोर्ट में आवेदन दे सकते हैं। इसकी एडवांस कॉपी एक दिन पहले यानी 27 जून तक CBI को देनी होगी। इस आदेश के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर रोक भी लगा दी।

ममता ने कहा कि हाईकोर्ट हमें अपना पक्ष रखने नहीं दे रहा
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में ममता और मलय ने कहा था कि CBI के आरोपों पर अपना पक्ष रखने के लिए हाई कोर्ट मौका नहीं दे रहा है। जबकि CBI ने कहा कि दोनों पक्षों की ओर से बहस के बाद ही हलफनामा दिया गया। नोटिस बहुत पहले ही दे चुके थे। सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि याचिकाकर्ता ने देरी से हरफनामा क्यों दायर किया?

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