Monday, September 20, 2021
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वायरस के नए स्वरूपों से भय की जरूरत नहीं, वैक्सीन की बूस्टर डोज मुकाबला कर सकेंगी

अंतिम नतीजे पर पहुंचने में कुछ माह लगेंगे। - Dainik Bhaskar

अंतिम नतीजे पर पहुंचने में कुछ माह लगेंगे।

कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट से दुनिया के विशेषज्ञ पहले ही चिंतित थे। अब डेल्टा प्लस वैरिएंट की हलचल ने लोगों का ध्यान खींचा है। भारत के कुछ राज्यों में डेल्टा प्लस के मामले मिले हैं। डेल्टा का मूल वैरिएंट अधिक तेजी से फैलता है। गंभीर रूप से बीमार कर सकता है।

लिहाजा, भारत के स्वास्थ्य अधिकारियों का नए स्वरूप के प्रभाव पर चिंता जाहिर करना सही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस के नए स्वरूपों से बचाव के लिए वैक्सीन की बूस्टर डोज की जरूरत पड़ सकती है। वैसे, अतिरिक्त डोज की जरूरत के संबंध में निश्चित नतीजे पर पहुंचने में अभी कुछ माह और लगेंगे।

वैज्ञानिक वैक्सीन की अतिरिक्त डोज लेने वाले लोगों और सामान्य डोज लेने वाले लोगों में वायरस से लड़ने के लिए बनी एंटीबॉडीज के स्तर की तुलना कर रहे हैं। वे इस बात पर भी नजर रख रहे हैं क्या अतिरिक्त डोज तेजी से फैलने वाले वैरिएंट के खिलाफ सुरक्षा दे सकती है। शुरुआती अध्ययनों से पता लगा है कि वैक्सीन की दो डोज लेने वाले लोगों को छह माह और उससे लंबे समय तक सुरक्षा मिलती है। यह इम्युनिटी वायरस के अलग-अलग स्वरूपों से बचाव करने में सक्षम है। बूस्टर डोज से अतिरिक्त सुरक्षा हासिल हो सकती है।

वायरस के नए वैरिएंट डेल्टा प्लस के 417 एन नामक अतिरिक्त म्यूटेशन है। केम्ब्रिज संक्रामक बीमारी इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर डॉ. रवींद्र गुप्ता का कहना है, 417 बहुत अधिक महत्वपूर्ण स्वरूप नहीं है। डेल्टा वैरिएंट ही घातक है। दरअसल, 417 वैरिएंट नया नहीं है। यह पहले ही ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका में सबसे पहले मिले वायरस के अन्य प्रमुख स्वरूपों-बी.1.1.7 या अल्फा में पाया जा चुका है। स्वास्थ्य अधिकारियों को डेल्टा प्लस से विचलित नहीं होना चाहिए। उन्हें मूल डेल्टा पर फोकस करना चाहिए।

डॉ. गुप्ता की लैब में प्राकृतिक इंफेक्शन या वैक्सीनों से मिली इम्युनिटी का अध्ययन किया गया है। उसमें पाया गया है कि डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन पूरी सुरक्षा देती हैं। लेकिन, उसमें अल्फा वैरिएंट के मुकाबले कम एंटीबॉडी बनती हैं। इसलिए डेल्टा और डेल्टा प्लस के खिलाफ प्रतिरोध की क्षमता विकसित करने के लिए नई वैक्सीन की बूस्टर डोज की जरूरत पड़ेगी।

ड्यूक वैक्सीन इंस्टीट्यूट की डायरेक्टर प्रियंवदा आचार्य का कहना है, हमें नए वैरिएंट के संबंध में चिंतित होना चाहिए। फिर भी, नए स्वरूपों से दहशत में आने की जरूरत नहीं है। लेकिन, जितनी जल्दी संभव हो सके लोगों को वैक्सीन लगाई जाए। समय बीतने के साथ वायरस के नए वैरिएंट वैक्सीन से मिली प्रतिरोध क्षमता से बच सकते हैं। इंस्टीट्यूट की एक अन्य विशेषज्ञ सोफी गोबील का कहना है, वायरस वैक्सीनों से बचाव की कोशिश में जुटा है। लिहाजा, उससे निपटने के लिए अधिक और अलग वैक्सीनों की जरूरत पड़ सकती है।

वैक्सीनेशन के अभियान में चार हजार संगठन जुटे

राष्ट्रपति जो बाइडेन की पहल पर अमेरिका में वैक्सीनेशन के अभियान से बड़े पैमाने पर धार्मिक, सामाजिक और स्वयंसेवी संगठनों को जोड़ा गया है। कोविड-19 कम्युनिटी कोर से चार हजार संगठन जुड़े हैं। इनकी बैठकें व्हाइट हाउस में होती हैं। धार्मिक प्रमुखों, सामाजिक समूहों के नेताओं, विशेषज्ञों और डॉक्टरों की टीम को बीमारी नियंत्रण केंद्रों और नेशनल हेल्थ इंस्टीट्यूट द्वारा अभियान की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी जाती है। कोर के सदस्य वैक्सीन को लेकर सामाजिक और राजनीतिक विरोध को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। वैक्सीन संबंधी हिचक पर सर्वे के आधार पर रणनीति बनाई जा रही है।

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