Sunday, July 25, 2021
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उमर बोले- एक बैठक से दूरी कम नहीं होती, महबूबा ने कहा-कश्मीरी जोर से सांस भी लें तो उन्हें जेल में डाल देते हैं

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जम्मू-कश्मीर की दिल्ली और दिल से दूरी कम होनी चाहिए… 8 दलों के 14 नेताओं के साथ 3 घंटे चली बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यही संदेश दिया। पर, इस बैठक के तुरंत बाद ही राज्य के दो बड़े नेताओं के बयान से स्पष्ट कर दिया कि बैठक तो दिल्ली में हो गई, पर दिल अभी दूर ही हैं।

नेशनल कॉन्फ्रेंस लीडर उमर ने कहा कि एक मुलाकात में दूरियां नहीं मिटतीं। वहीं, PDP चीफ महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कश्मीर में सांस लेना भी मुश्किल है। भारत को पाकिस्तान के साथ दोबारा बात शुरू करनी चाहिए। प्रधानमंत्री आवास पर चली बैठक के बाद 5 बड़े नेताओं ने क्या कहा, पढ़िए….

चीन से बात कर सकते हैं तो पाकिस्तान से क्यों नहीं- महबूबा मुफ्ती
मैंने जम्मू-कश्मीर के लोगों की मुसीबतें प्रधानमंत्री के सामने रखीं। 5 अगस्त 2019 के बाद से कश्मीरी नाराज हैं। मैंने प्रधानमंत्री ने कहा कि असंवैधानिक तरीके से अनुच्छेद-370 को हटाया, ये जम्मू-कश्मीर के लोगों को पसंद नहीं है। हम इसके खिलाफ संघर्ष करते रहेंगे और इसे बहाल करेंगे। ये दर्जा हमें पाकिस्तान से नहीं मिला था। ये हमें जवाहर लाल नेहरू और वल्लभ भाई पटेल ने दिया था। ये हमारे डोमेसाइल को सुरक्षित करता है। मैंने कहा कि अगर अनुच्छेद-370 हटाना था तो विधानसभा को बुलाया जाना चाहिए था। हमें इसे संवैधानिक तरीके से री-स्टोर करना चाहते हैं।

हमने कहा कि चीन के साथ आप बात कर रहे हैं, जिसका देश की अवाम के साथ कोई सीधा लेना-देना नहीं है। आपने पाकिस्तान से बातचीत की और इससे सीजफायर कम हुआ, इसका हम स्वागत करते हैं। पाकिस्तान से फिर बातचीत करनी चाहिए ताकि जो ट्रेड उनके साथ रुका है, वो बहाल हो।

UAPA की सख्ती बंद हो, जेलों में बंद कैदियों को रिहा किया जाना चाहिए। आप रोज कानून जारी कर देते हैं। जमीनें और रोजगार सुरक्षित होने चाहिए। जो भी हमारा 2019 के बाद नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई के लिए पैकेज दिया जाना चाहिए। जम्मू-कश्मीर के लोग तंग आ गए हैं कि जोर से सांस भी लें तो उन्हें जेल में डाला जाता है।

कश्मीरियों को अपनी पसंद की सरकार चुनने का हक- उमर अब्दुल्ला
हम 370 पर अपनी लड़ाई अदालत में लड़ेंगे। हमने प्रधानमंत्री से भी कहा कि जम्मू-कश्मीर और केंद्र के बीच विश्वास को दोबारा कायम करना आपकी जिम्मेदारी है। इसके लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए। जम्मू-कश्मीर को यूनियन टेरेटरी का दर्जा दिया गया है, कश्मीरी इसे पसंद नहीं करते हैं। जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। परिसीमन की कोई जरूरत नहीं है। इससे बहुत संदेह पैदा होते हैं। लोगों को अपनी पसंद की सरकार चुनने और सरकार को राज्य के लिए फैसले लेने का हक होना चाहिए।

एक मुलाकात से न दिल की दूरी कम होती है और न दिल्ली की दूरी कम होती है। एक मीटिंग में इस बात की उम्मीद करना गलतफहमी होगी। हालांकि, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री दोनों ने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करना और चुनाव कराना हम भी चाहते हैं।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत करने पर सभी ने जोर दिया- गृह मंत्री शाह
जम्मू-कश्मीर को लेकर हुई आज की बैठक बेहद दोस्ताना माहौल में पूरी हुई है। बैठक में शामिल सभी नेताओं ने लोकतंत्र और संविधान के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। इस बैठक में जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। हम जम्मू-कश्मीर के संपूर्ण विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमने सदन में जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किए जाने की बात कही थी। इसके लिए परिसीमन की प्रक्रिया और शांतिपूर्ण चुनाव बेहद जरूरी हैं।

उम्मीद है कश्मीरियों को कुछ हासिल होगा- पीपुल्स कॉन्फ्रेंस लीडर लोन
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के लीडर सज्जाद लोन ने कहा कि हम इस बैठक से सकारात्मकता लेकर बाहर आए हैं। हमें उम्मीद है कि इस बैठक से जम्मू-कश्मीर के लोगों को कुछ हासिल होगा।

वहीं, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे मुजफ्फर हुसैन ने कहा कि सभी नेताओं ने राज्य के दर्जे की मांग की है। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए और फिर दूसरे मुद्दों को हल करना चाहिए। ये संतोषजनक मीटिंग थी। कश्मीर में अमन बहाल करने पर सभी एकमत हैं।

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