Monday, August 2, 2021
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इमरान खान बोले- अमेरिका को मिलिट्री-एयरबेस बिल्कुल नहीं देगा पाकिस्तान; बाइडेन ने अब तक खान से नहीं की है बातचीत

पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों में तल्खी और बढ़ती जा रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक इंटरव्यू में साफ तौर पर कहा है कि उनकी सरकार किसी भी कीमत पर अमेरिका को अपने मिलिट्री या एयरबेस नहीं देगी। हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान सरकार के अड्डे देने से इनकार के बावजूद अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के अफसर लगातार इस्लामाबाद के दौरे कर रहे हैं। अमेरिकी अफसर पाकिस्तान सरकार के बजाए वहां की खुफिया एजेंसी ISI और आर्मी के अफसरों से मुलाकात कर रहे हैं।

जो बाइडेन को राष्ट्रपति बने 5 महीने से ज्यादा हो चुके हैं। उन्होंने दुनिया के लगभग हर बड़े राष्ट्राध्यक्ष को फोन किया है, लेकिन इमरान की गुजारिश के बावजूद उनसे बात नहीं की है। ऐसे में अमेरिका की नाराजगी पाकिस्तान को कई मोर्चों पर भारी पड़ सकती है।

इमरान ने क्या कहा
इमरान ने अमेरिकी टीवी चैनल HBO Axios को एक इंटरव्यू दिया है। इसमें एंकर जोनाथन स्वान ने उनसे सीधा सवाल पूछा- क्या पाकिस्तान CIA को अफगानिस्तान में तालिबान, अलकायदा या आईएस के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मिलिट्री या एयरबेस देगा? इमरान का जवाब था- बिल्कुल नहीं। इस बात की कोई संभावना नहीं है कि पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल अफगानिस्तान में हमले करने की मंजूरी दी जाए।

ये तनातनी आखिर क्यों
अमेरिकी सैनिक 11 सितंबर तक अफगानिस्तान से लौट जाएंगे। अमेरिका चाहता है कि उसे पाकिस्तान में मिलिट्री या एयरबेस मिलें ताकि वो यहां से अफगानिस्तान में आतंकियों के खिलाफ हवाई हमले कर सके। 2001 में हुए 9/11 हमलों के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका से मोटी रकम लेकर ये सुविधा दी थी। इससे नाराज होकर तालिबान ने पाकिस्तान में भी कई आतंकी हमले किए थे। इसमें पेशावर स्कूल हमला भी शामिल हैं, जिसमें 120 बच्चे मारे गए थे। तालिबान भी पाकिस्तान को चेतावनी दे चुका है कि अगर उसने अमेरिका को अड्डे दिए तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। उधर, चीन को भी लगता है कि अगर अमेरिका को पाकिस्तान में अड्डे मिल गए तो वो चीन की हरकतों पर हाईटेक ड्रोन्स के जरिए पैनी नजर रख सकेगा।

अमेरिकी पत्रकार जोनाथन स्वान के साथ इंटरव्यू के दौरान इमरान खान।

अमेरिकी पत्रकार जोनाथन स्वान के साथ इंटरव्यू के दौरान इमरान खान।

पाकिस्तान को भारी पड़ सकती है जिद
पाकिस्तान अगर अमेरिका को अड्डे नहीं देता है तो अमेरिका के पास तीन विकल्प हैं। वो ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान या उज्बेकिस्तान में बेस ले सकता है। तुर्कमेनिस्तान में तो पहले ही उसका एक एयरबेस बताया जाता है। लेकिन, अमेरिका को नाराज करना पाकिस्तान को बहुत भारी पड़ सकता है। 21 से 25 जून तक FATF की मीटिंग है। पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में है। अमेरिकी दबाव में हो सकता है कि उसे ब्लैक लिस्ट किया जाए या फिर ग्रे लिस्ट में ही रखा जाए। यूरोपीय यूनियन पहले ही पाकिस्तान के स्पेशल पैकेज पर रोक लगा चुकी है।

वैसे हैरानी की बात यह है कि मई के दूसरे हफ्ते में अमेरिकी NSA जैक सुलिवान ने सीनेट को बताया था कि पाकिस्तान की सरकार अमेरिका को मिलिट्री और एयरबेस देने के लिए तैयार है और वो हर मामले पर सहयोग कर रहे हैं।

सेना को नाराज कर रहे हैं इमरान
पाकिस्तानी मीडिया में कई दिनों से इस तरह की खबरें हैं कि CIA चीफ पिछले दिनों इस्लामाबाद की सीक्रेट विजिट पर आए थे और उन्होंने आर्मी चीफ बाजवा और आईएसआई चीफ जनरल फैज से मुलाकात की थी। डिफेंस सेक्रेटरी जस्टिन लॉयड भी इन दोनों अफसरों के संपर्क में हैं। माना जा रहा है कि फौज अमेरिका से समझौते का दबाव डाल रही है, लेकिन इमरान कट्टरपंथी वोटरों को नाराज नहीं करना चाहते।

पिछले दिनों जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री यूएन असेंबली में शिरकत के लिए न्यूयॉर्क गए थे तब अमेरिकी फॉरेन सेक्रेटरी एंटनी ब्लिंकेन ने उन्हें मुलाकात का वक्त देने से इनकार कर दिया।

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