Thursday, July 29, 2021
Homeमनोरंजनपलक मुच्छाल बोलीं- इमोशनल मोमेंट तब होता है, जब डॉक्टर कहते हैं...

पलक मुच्छाल बोलीं- इमोशनल मोमेंट तब होता है, जब डॉक्टर कहते हैं बधाई हो, तुम्हारा बच्चा बच गया

बचपन से हार्ट पेशेंट की सर्जरी के लिए कॉन्सर्ट करती आ रहीं सिंगर पलक मुच्छाल का नाम गिनीज बुक और लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। इतना ही नहीं सीबीएससी के 7th स्टैंडर्ड और महाराष्ट्र बोर्ड में भी उनकी सेवा कार्य का चैप्टर जोड़ा गया है। खैर, इन दिनों रिलीज हुई सीरीज ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ में उनके गाने की चर्चा है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान पलक ने अपनी समाज सेवा और म्यूजिक इंडस्ट्री पर बातचीत की और बताया कि इमोशनल मोमेंट तब होता है, जब डॉक्टर कहते हैं कि पलक बधाई हो, तुम्हारा बच्चा बच गया है।

Q.‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ में गाने के लिए किस तरह से रिस्पॉन्स मिल रहा है? रिकॉर्डिंग का एक्सपीरियंस कितना अलग रहा?
A.‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ में जो ‘क्या किया है तूने’ गाना है, उसके लिए बहुत सारा प्यार मिल रहा है। मैंने इसके संगीतकार अमाल मलिक के लिए गाना गाया है। मैंने पहले भी उनके लिए जब-जब गाना गाया है, तब-तब मुझे उसके लिए ढेर सारा प्यार मिला है। इस गाने की रिकॉर्डिंग का अनुभव काफी अलग रहा। जहां एक तरफ मैं अपने घर पर बने स्टूडियो से गाना रिकॉर्ड कर रही थी वहीं दूसरी तरफ अमाल अपने स्टूडियो में बैठकर वीडियो कॉल पर निर्देश दे रहे थे। इस तरह इसे सेम टाइम वीडियो कॉल पर रिकॉर्ड किया गया था। यह लॉकडाउन का ही प्रभाव था, क्योंकि बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं है। लेकिन हमें रिकॉर्डिंग का एक नया तरीका मिल गया था।

Q.लॉकडाउन का म्यूजिक जगत पर किस तरह का प्रभाव पड़ा है?
A.मुझे लगता है, फिल्मों का ओटीटी पर आना ही सबसे बड़ा प्रभाव है, जो हम सबने एक्सपीरियन्स किया है। अभी भी बहुत सारी फिल्में थिएटर खुलने का इंतजार कर रही हैं। इन फिल्मों में मेरे काफी गाने हैं, जो आपको सुनने को मिलेंगे। म्यूजिक के लिए इस समय को अच्छा तो नहीं बोल सकते, लेकिन यह समय काफी प्रोडक्टिव रहा है। मैंने खुद लॉकडाउन में जितने गाने रिकॉर्ड किए हैं, आमतौर पर उतने मैं रिकॉर्ड नहीं करती हूं। अभी म्यूजिक ही एक ऐसा जरिया है, जिससे लोगों को होप और पॉजिटिविटी मिल रही है। यह मनोरंजन का एक साधन है। लोग म्यूजिक को कंज्यूम भी कर रहे हैं और लोग बहुत
सारा म्यूजिक प्रोड्यूस भी कर रहे हैं।

Q.लॉकडाउन में कितने गाने रिकॉर्ड किए और क्या खास किया है?
A.लॉकडाउन में कितने गाने रिकॉर्ड किए इसकी सही-सही गिनती तो याद नहीं है, पर काफी सारे रिकॉर्ड किए हैं। रिकॉर्डिंग के साथ बच्चों की मदद करने का मिशन तो चल ही रहा था। लेकिन इससे आगे बढ़कर जरूरतमंद लोगों की मदद की। पॉजिटिव रहकर मैंने वक्त बिताने की कोशिश की।

Q.वेब सीरीज में गाने के लिए क्या बातें हैं, जो प्रेरित करती हैं?
A.वेब सीरीज में गाना एकदम अलग प्रोजेक्ट के तौर पर मैंने नहीं लिया। जिस तरह मैं गाती हूं, यह उसी तरह का अप्रोच रहा है। मुझे जो गाना पसंद आता है, उसे ही गाती हूं। यह गाना फिल्म या वेब सीरीज किस प्लेटफॉर्म के लिए है, उसका रिलेशन मेरे गाने से बिल्कुल भी नहीं होता है।

Q.ओटीटी कंटेंट पर 26 मई से सेंसर बोर्ड के कुछ प्रावधान लागू किए गए हैं, इस पर क्या राय है आपकी?
A.यह बहुत अच्छी बात है। सेंसर होना बहुत ज्यादा जरूरी भी है। ओटीटी प्लेटफॉर्म आसानी से सारे गैजेट्स पर उपलब्ध है। बहुत सारे बच्चे हैं, जो ओटीटी को कंज्यूम करते हैं। उस पर चीजें देखते हैं, इसलिए सेंसरशिप होना जरूरी है। ताकि लोग चूज कर सकें कि हमें क्या देखना है।

Q.कोरोना काल का असर म्यूजिक इंडस्ट्री पर किस तरह से पड़ा है और चीजें किस तरह से बदल गई हैं?
A.जहां तक म्यूजिक इंडस्ट्री की बात है, तो इसका दायरा बहुत बड़ा है। इसमें सिंगर, म्यूजिक डायरेक्टर, म्यूजिशियन, तकनीशियन आदि बहुत सारे लोग होते हैं। मेरे या कई सारे म्यूजिक डायरेक्टर के गानों की रिकॉर्डिंग नहीं रुकी, क्योंकि उनके पास खुद के स्टूडियो हैं। लेकिन कॉन्सर्ट नहीं होने की वजह से कई सारे म्यूजिशियन बेरोजगार हो गए हैं। अभी हम बता भी नहीं सकते कि कब तक पब्लिक शोज हो पाएंगे। जिस तरह से दूसरे रोजगार पर लॉक डाउन का असर हुआ है, उसी तरह म्यूजिक इंडस्ट्री भी प्रभावित हुई है।

Q.आपने बताया था कि शोज के पेमेंट को हार्ट पेशेंट्स के लिए खर्च करती हैं। लेकिन कोरोना काल में शोज बंद हैं, ऐसे में हार्ट पेशेंट्स की सेवा कार्य को कैसे मैनेज कर रही हैं?
A.जब हम अच्छा काम करते हैं, तब भले ही एक दरवाजा बंद हो जाए, पर दूसरा खुल जाता है। उसी तरह कोरोना काल में नया टर्म उजागर हुआ, जिसका नाम ऑनलाइन कांसर्ट है। इसेमें जूम या दूसरे वीडियोज प्लेटफॉर्म के जरिए बहुत सारे कांसर्ट हो रहे हैं। मैं आलमोस्ट हर वीकेंड पर परफॉर्म करती हूं। इसमें मिलने वाली राशि बच्चों की सर्जरी के लिए जाती है। हां, इसपर
कोरोना का असर जरूर पड़ा है।

Q.खुद की म्यूजिक कंपनी के तहत क्या खास कर रही हैं। कैसा रिस्पांस मिल रहा है?
A.एक्चुअली, यह म्यूजिक कंपनी मेरी नहीं, मेरे भाई पलाश की है। जबकि लोगों को लगता है कि यह मेरी कंपनी है। इसके तहत वह काफी सारे नए टैलेंट को चांस दे रहा है। काफी सारे स्टैबलिश सिंगर्स के गाने इसके तहत निकले हैं। मुझे बहुत खुशी है कि भाई इस प्लेटफॉर्म के जरिए काफी टैलेंट को निखार रहा है और लोगों को सामने ला रहा है।

Q.पिछली मुलाकात में हॉर्ट पेशेंट के लिए मध्यप्रदेश में हॉस्पिटल खोलने की इच्छा जाहिर की थी। इस पर आप कितना आगे बढ़ीं?
A.जरूर, मैं इस प्लान पर एक कदम आगे बढ़ी हूं। इसके लिए जो कंस्ट्रक्शन टीम बनाई गई है, उनसे मेरी बातचीत होना शुरू हो गई है। हम प्लान और स्ट्रक्चर डिसाइड कर रहे हैं। ओवर ऑल आर्किटेक्चर के बारे में बात की जा रही है। आशा करती हूं कि एक से डेढ़ साल में ये हॉस्पिटल खुल जाना चाहिए। यह कितना बड़ा होगा? सुविधाएं कितनी अत्याधुनिक होगीं? इसकी जानकारी एक बार प्लान अप्रूव हो जाए, उसके बाद ही बता पाऊंगी।

Q.आगे क्या करने का सपना है?
A.मेरे सपने तो दिन-प्रतिदिन और बढ़ते जा रहे हैं। एक सपना पूरा होता है, तब उससे तुरंत बाद दूसरा सपना कायम हो जाता है। सबसे पहले तो 400 बच्चों के सर्जरी की जो वेटिंग लिस्ट है, सारा फोकस उस पर है। मैं उसके लिए लगातार प्रयास कर रही हूं। मेरे गाने भी बहुत सारे आ रहे हैं। इस तरह अभी के जो गोल हैं, उन पर फोकस कर रही हूं। अल्टीमेट गोल तो यही है कि जब तक गाना है, तब तक समाजसेवा जारी रखना है और गाना तो जिंदगी भर ही है।

Q.सेवा के दौरान ऐसा कोई मूवमेंट, जो एकदम इमोशनल बन पड़ा हो?
A.बहुत सारे मूवमेंट आए हैं। जब भी सर्जरी होती है, तब ऑपरेशन थिएटर में रहने की कोशिश करती हूं। बचपन से ही मुझे ऑपरेशन थिएटर में रहने के लिए डॉक्टर अलाऊ करते थे। थिएटर के अंदर ओंकार मंत्र का जाप करती हूं। सबसे ज्यादा इमोशनल मूवमेंट तब होता है, जब सर्जरी के बाद डॉक्टर आकर कहते हैं कि पलक बधाई हो, तुम्हारा बच्चा बच गया। यह एक टाइम है, जिसे बार-बार जीना चाहती हूं। यह अवसर बार-बार मेरी जिंदगी में आता भी है। इससे ज्यादा खुशी मुझे और किसी भी चीज में नहीं होती है।

Q.पेशेंट के परिवार वाले आपको किस रूप में याद करते हैं?
A.ऐसे लोग जो बच्चों की सर्जरी का खर्च नहीं उठा पाते, उनके बस में जो भी चीजें होती हैं, उसे मेरे बर्थडे, फेस्टिवल आदि अवसर पर पहुंचा देते हैं। कई बार कोई सेब तो कई बार किसान गाजर, अनाज आदि पहुंचाता है। कई बार खेत की पहली फसल की भेंट देते हैं। मैं भी कुछ बच्चों को रक्षाबंधन के अवसर पर राखी भेजती हूं। अब तो ऐसा लगता है कि बच्चे मेरी जिंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा हैं।

Q.आपकी सेवा को देखते हुए किताब में चैप्टर भी जोड़ा गया है। इस पर आप क्या कहेंगी?
A.पहली बार मुझे सीबीएससी के सिलेबस में शामिल होने की खबर कॉन्सर्ट के दौरान मिली थी। उस समय मैं किसी शहर में परफॉर्म कर रही थी, तब वहां पर एक बच्ची हाथ में किताब लेकर मेरी तरफ इशारा कर रही थी। मैंने उसके पास जाकर पूछा कि क्या हुआ? तब बच्ची ने कहा कि दीदी! हम तो आपको स्कूल में पढ़ते हैं। मैंने जानकारी ली, तब पता चला कि सीबीएससी के 7 स्टैंडर्ड में मॉर्डन साइंस के सब्जेक्ट में एक चैप्टर एड किया गया है, यह मेरे अचीवमेंट को लेकर है। अभी पता चला कि महाराष्ट्र बोर्ड के संस्कृत की बुक में भी मुझ पर एक चैप्टर जोड़ा गया है। यह जानकर मुझे बहुत खुशी मिलती है।

Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments