Monday, August 2, 2021
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कमर तक भरे पानी को पार करके स्कूल जाते थे राष्ट्रपति कोविंद; दोस्त की गलती पर खुद मांगी माफी, जुर्माना भरने को भी थे तैयार

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज शाम तक कानपुर पहुंच जाएंगे। यहां से वह अपने पैतृग गांव परौंख भी जाएंगे। राष्ट्रपति से पहले ‘दैनिक भास्कर’ ने लगातार दूसरे दिन उनके गांव से ग्राउंड रिपोर्ट की। इस दौरान राष्ट्रपति के बचपन के दोस्त जसवंत सिंह गौर, भानु प्रताप सिंह और राजकिशोर से मुलाकात हुई और उन्होंने पुराने किस्से सुनाए। उनमें से ये दो किस्से आपके दिल को छू लेंगे…

राष्टपति के बचपन के दोस्त विजय पाल भदौरिया और राजकिशोर सिंह गौर

राष्टपति के बचपन के दोस्त विजय पाल भदौरिया और राजकिशोर सिंह गौर

1. कमर तक गांव में भरा रहता था पानी, मंझाकर जाते थे पढ़ने स्कूल
राष्ट्रपति के बचपन के दोस्त विजय पाल भदौरिया बड़ा ही रोचक किस्सा बताते हैं। कहते हैं कि हमारे बचपन के दिनों में महीनों लगातार बारिश होती रहती थी। गांव में कमर तक पानी भर जाता था। इसके बाद भी रामनाथ कोविंद स्कूल जाना बंद नहीं करते थे।
अपना कुर्ता-पायजामा हाथ में लेकर पानी मंझाते हुए स्कूल पहुंचते थे। एक-दो दिन नहीं लगातार महीनों तक हम लोगों को पानी मंझाकर ही स्कूल जाना पड़ता था। घर की आर्थिक तंगी, मां का उनके बचपन में निधन और तमाम परेशानियों के बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई से कभी मुंह नहीं मोड़ा। इसी का नतीजा रहा कि आठवीं तक गांव में पढ़ने के बाद कानपुर में इंटर फिर स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी।

2. सहपाठी ने गन्ना चुराया तो किसान के सामने जाकर खुद माफी मांगी
परौंख में ही रहने वाले बुजुर्ग राज किशोर सिंह गौर भी राष्ट्रपति कोविंद के बचपन के साथी हैं। बताते हैं कि कोविंद शुरू से ही ईमानदार और सरल स्वभाव के रहे हैं। बचपन में गांव से चार किलोमीटर दूर जूनियर हाईस्कूल में हभी दोस्त एक साथ पढ़ने जाते थे। एक दिन की बात है कि स्कूल से लौटते समय एक दोस्त ने खेत से गन्ना चोरी कर लिया। किसान ने छात्र को दौड़ाकर पकड़ लिया। इसके बाद राष्ट्रपति ने किसान के पास जाकर दोस्त की इस हरकत पर खुद माफी मांगी। गन्ने के बदले पैसे देने की भी बात कही। तब जाकर किसान ने उनके दोस्त को छोड़ा।

राष्ट्रपति भवन में उनके बचपन के दोस्त और परौंख के लोग

राष्ट्रपति भवन में उनके बचपन के दोस्त और परौंख के लोग

राष्ट्रपति बनने के बाद दोस्तों को बुलाया था राष्ट्रपति भवन
गांव के दोस्त उनके नजदीकियों ने बताया कि राष्ट्रपति जैसे पहले हमारे लिए गांव के लल्ला और चहेते थे, उसी तरह आज भी उनका स्वभाव और गांव के लोगों से लगाव है। राष्ट्रपति बनने के बाद वह लगातार गांव के लोगों के संपर्क में रहते हैं। इतना ही नहीं शपथ ग्रहण लेने के बाद ही उन्होंने गांव के दोस्तों और नजदीकियों को राष्ट्रपति भवन में बुलाया था। साथ में खाना खाने के साथ पूरा राष्ट्रपति भवन घुमाया। इससे सभी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। बल्कि राष्ट्रपति बनने के बाद वह और सहज और सरल हो गए।

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