Thursday, July 29, 2021
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रानी रामपाल ने कहा- ज्यादातर खिलाड़ी कोरोना को हराकर लौटे हैं, वे अब देश को ओलिंपिक में पहला मेडल दिलाने के लिए तैयार

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भारतीय महिला हॉकी टीम इस साल इतिहास में तीसरी बार ओलिंपिक खेलेगी। टीम की कमान रानी रामपाल संभाल रही हैं। भारतीय महिला टीम ने 1980 में पहली बार ओलिंपिक खेला था। तब मॉस्को गेम्स में टीम चौथे नंबर पर रही थी। इसके 36 साल बाद टीम को 2016 रियो ओलिंपिक में मौका मिला। इस बार टीम ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई थी। तब टीम छठे नंबर पर रही थी। हालांकि, अब रानी की कप्तानी में टीम के टोक्यो ओलिंपिक में मेडल जीतने की पूरी उम्मीद है।

रानी की कप्तानी में टीम ने पिछले कुछ सालों में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। इस दौरान टीम ने एशिया कप 2017 में गोल्ड, एशियन गेम्स 2018 में सिल्वर, एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2018 में सिल्वर और FIH सीरीज फाइनल 2019 में जीत हासिल की है।

कोरोना महामारी में महिला टीम के ज्यादातर खिलाड़ी संक्रमित हुए थे, जो अब ठीक होकर पूरी तरह तैयार हैं। कप्तान रानी रामपाल ने कहा कि जिन प्लेयर्स को कोरोना हुआ था, वे ठीक होकर लौट आए हैं। सभी देश को ओलिंपिक में पहला मेडल दिलाने के लिए तैयार हैं। दरअसल, महिला हॉकी टीम अब तक कोई ओलिंपिक मेडल नहीं जीत सकी। पुरुष टीम 8 गोल्ड, एक सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज जीत चुकी है। दैनिक भास्कर ने रानी से ओलिंपिक और भारतीय टीम की तैयारियों को लेकर बात की…

  • टोक्यो ओलिंपिक में मेडल को लेकर आप कितनी आश्वस्त हैं, इसको लेकर टीम की रणनीति क्या होगी?

पहली बार हमने लगातार दूसरे ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई किया है। कुछ सालों में टीम के प्रदर्शन में लगातार सुधार हुआ है। ऐसे में मुझे पूरी उम्मीद है कि हम मेडल जरूर जीतेंगे। ओलिंपिक काफी बड़ा टूर्नामेंट है। ऐसे में हर मैच के हिसाब से हमारी रणनीति अलग होगी। लीग मैचों में अलग रणनीति के साथ उतरेंगे। जबकि क्वार्टरफाइनल में पहुंचने के बाद टीम की रणनीति को स्थिति के हिसाब से बदला जाएगा।

  • इस बार महिला टीम से काफी उम्मीदें हैं, क्या इसको लेकर टीम पर मानसिक दबाव रहेगा?

जब आप इतने बड़े टूर्नामेंट में खेलने जाते हैं तो कहीं न कहीं थोड़ा बहुत मानसिक दबाव तो रहता ही है। हमने मानसिक दबाव को कम करने को लेकर मेंटल हेल्थ पर भी फोकस किया है, ताकि हर हालात में हम संतुलन बनाए रखें।

  • आप और कुछ खिलाड़ी कोरोना संक्रमित हुए थे, इस दौरान किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा‌‌?

कोरोना की वजह से सभी खिलाड़ी करीब एक महीने बाद ही एक साथ ट्रेनिंग शुरू कर सके, क्योंकि सभी खिलाड़ी एक साथ संक्रमित नहीं हुए थे। कुछ पहले हो गए थे। कुछ बाद में हुए। वहीं, खिलाड़ी के लिए एक सेशन भी काफी महत्वपूर्ण रखता है। जबकि हम करीब 1 महीना ट्रेनिंग से दूर रहे। इसका फर्क कहीं न कहीं टीम की ट्रेनिंग पर जरूर पड़ा। पहले 14 दिन क्वारैंटाइन रहना पड़ा। फिर रिकवर होने में दो हफ्ते लग गए।

हालांकि इस दौरान हमारे कोचिंग स्टाफ और मेडिकल टीम का काफी सपोर्ट रहा। सभी ने यही कहा कि पहले स्वास्थ्य पर ध्यान देना है। उसके बाद ट्रेनिंग के बारे में सोचने की जरूरत है। अगर जल्दी स्वस्थ नहीं होंगे, तो आगे परेशानी होगी, इसलिए खाने-पीने पर ध्यान देने के लिए कहा गया। सभी के सहयोग से खिलाड़ी जल्दी रिकवर हो पाए और फिर से ट्रेनिंग शुरू हो सकी।

  • ओलिंपिक को देखते हुए किन चीजों पर फोकस किया?

आजकल का खेल फास्ट हो गया है। ऐसे में दूसरी टीमों से कॉम्पिटीशन के लिए फिटनेस बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। साथ ही ज्यादातर खिलाड़ी कोरोना से रिकवर होकर आए तो उनके लिए फिटनेस बहुत जरूरी थी। इन सभी को ध्यान में रखकर कोचिंग टीम ने फिटनेस पर ज्यादा फोकस किया। वहीं, पेनाल्टी कॉर्नर पर काम किया कि कैसे ज्यादा से ज्यादा पेनाल्टी कॉर्नर बनाए जा सकें। साथ ही गेम पर कंट्रोल करने को लेकर फोकस किया, ताकि ज्यादा से ज्यादा समय तक बॉल हमारे पास रहे।

  • महिला टीम साल के शुरुआत में विदेशी दौरे पर गई थी, यह ओलिंपिक के लिहाज से कितना महत्वपूर्ण रहा?

जनवरी में अर्जेंटीना और जर्मनी के टूर पर हम गए। हमने ओलिंपिक से कुछ महीने पहले टॉप की टीमों के साथ मैच खेले, जिसका फायदा हमें जरूर मिलेगा। इन मैचों में हमने देखा कि टीम काफी ज्यादा चांस क्रिएट कर रही थी, लेकिन इसको गोल में तब्दील करने में हम सफल नहीं रहे। ऐसे में वहां से आने के बाद हमने इस पर काम किया, ताकि मिले मौके को हम गोल में तब्दील कर सकें।

  • ओलिंपिक से पहले टीम की ट्रेनिंग का क्या प्लान है?

भारत में कोरोना की दूसरी लहर की वजह से कई देशों ने यात्रा पर बैन लगा रखा है। ऐसे में हमारा नेशनल कैंप बेंगलुरु में ही लगाया गया। हम यहीं पर ट्रेनिंग कर रहे हैं। अगर ओलिंपिक से कुछ दिन पहले किसी देश में जाकर ट्रेनिंग की अनुमति मिलती है तो टीम प्रशासन इसकी योजना को तैयार करेगी।

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