Thursday, July 29, 2021
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बैंकिंग इंडस्ट्री के लाभ में SBI और HDFC बैंक का आधा हिस्सा, कोरोना में अब तक का रिकॉर्ड प्रॉफिट

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  • निजी क्षेत्र में दूसरे सबसे बड़े बैंक ICICI बैंक का फायदा 16,192 करोड़ रुपए रहा है
  • SBI का पूरे साल के दौरान कुल फायदा 20 हजार 410 करोड़ रुपए रहा है

कोरोना की वजह से भले ही अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा हो, लेकिन बैंकिंग और शेयर मार्केट के लिए यह बेहतरीन रहा है। शेयर बाजार जहां नई ऊंचाई पर कारोबार कर रहा है, वहीं बैंकिंग इंडस्ट्री ने अपने इतिहास में अब तक का सबसे ज्यादा फायदा पिछले वर्ष कमाया है। दो साल बाद सरकारी बैंक फायदे में आए हैं।

1.02 लाख करोड़ रुपए का फायदा

बैंकिंग इंडस्ट्री ने वित्त वर्ष 2020-21 यानी पिछले साल अप्रैल से इस साल मार्च तक 1 लाख 2 हजार 252 करोड़ रुपए का फायदा कमाया है। यह उसके इतिहास में अब तक का सबसे ज्यादा लाभ है। हालांकि इसके एक साल पहले बैंकिंग इंडस्ट्री का कुल घाटा 5 हजार करोड़ रुपए था। इस आंकड़े में सरकारी बैंकों ने दो साल के भारी भरकम घाटे के बाद पहली बार फायदा कमाया है। बैंकिंग इंडस्ट्री के कुल फायदे में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और HDFC बैंक का आधा हिस्सा है। SBI सरकारी क्षेत्र का सबसे बड़ा बैंक है तो HDFC निजी सेक्टर का सबसे बड़ा बैंक है।

20,410 करोड़ रुपए का फायदा

SBI का पूरे साल के दौरान कुल फायदा 20 हजार 410 करोड़ रुपए रहा है। यह बैंकिंग इंडस्ट्री के कुल लाभ का 20% है। HDFC बैंक का फायदा 31,116 करोड़ रुपए रहा है। यह इंडस्ट्री का 30% है। एक साल पहले की तुलना में इस बैंक के फायदे में 18% का उछाल दिखा है। देश में निजी क्षेत्र में दूसरे सबसे बड़े बैंक ICICI बैंक का फायदा 16,192 करोड़ रुपए रहा है। यह एक साल पहले की तुलना में दोगुना है।

तीन बैंकों का हिस्सा 65% है

यानी तीन बैंकों का हिस्सा कुल फायदे में करीबन 65% है। इसी के साथ निजी क्षेत्र के बैंकों की बाजार हिस्सेदारी भी बढ़ी है। हालांकि सरकारी बैंकों ने इस दौरान जबरदस्त प्रदर्शन किया है क्योंकि वे दो साल से घाटे में थे। देश में कुल 12 सरकारी बैंकों में से केवल दो बैंकों पंजाब एंड सिंध बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने पिछले साल घाटा दिखाया है। इसमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को सरकार बेचने की योजना बना रही है।

यस बैंक का सबसे खराब प्रदर्शन

निजी क्षेत्र में यस बैंक सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला बैंक रहा है। इसे 3,462 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। एक साल पहले भी इसका घाटा ही रहा है। पूरे सरकारी बैंकों का कुल फायदा 57,832 करोड़ रुपए रहा है जबकि एक साल पहले इसकी तुलना में 26 हजार करोड़ रुपए का घाटा था। उसके एक साल पहले इन बैंकों का घाटा 31 हजार 817 करोड़ रुपए था।

बांड पोर्टफोलियो से फायदा

इक्रा की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी बैंकों के बांड पोर्टफोलियो खातों की वजह से फायदा बढ़ा है। यह बैंकों के फायदे में दो तिहाई का योगदान करता है। SBI ने इसी तरह के बांड्स की बिक्री की थी। सरकारी बैंकों के बांड की बिक्री से जो फायदा रहा है वह सरकार द्वारा बैंकों को दी गई 20 हजार करोड़ रुपए की रकम से ज्यादा रहा है।

दो दर्जन सरकारी बैंक थे

दरअसल देश में कुल करीबन दो दर्जन सरकारी बैंक थे। इसमें से आधे बैंकों को बड़े बैंकों में मिला दिया गया है। इस वजह से अब केवल 12 बैंक हैं। जबकि अभी 4 बैंकों को निजी बैंक बनाने की योजना है। इस तरह से देश में केवल 8 सरकारी बैंक रह जाएंगे। इसमें SBI, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा तीन सबसे बड़े बैंकों की लिस्ट में हैं।

जानकारों के मुताबिक, कोरोना का असर बैंकों की बैलेंसशीट पर नहीं दिखा है। क्योंकि बैंकों ने डिफॉल्ट लोन की रिस्ट्रक्चरिंग कर दिया था। कोरोना की दूसरी लहर में बैंकों ने उधारी लेने वालों को और समय दिया है। इससे बैंकों की डूबने वाली रकम में कोई ज्यादा बढ़त की उम्मीद नहीं है।

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