Monday, August 2, 2021
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भास्कर इंटरव्यू: स्वरा भास्कर बोलीं- चुनाव प्रचार करने पर 3-4 ब्रांड्स ने डील तोड़ दी थी, फिर जब NRC का विरोध किया तो एक ब्रांड ने बाहर निकाल दिया

एक्ट्रेस स्वरा भास्कर की शॉर्ट फिल्म ‘दोबारा अलविदा’ हाल ही में रिलीज हुई है। फिल्म में गुलशन देवैया उनके को-स्टार हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान उन्होंने फिल्म से जुड़ी बातों के साथ-साथ पर्सनल-प्रोफेशनल बाते भी शेयर कीं और बताया कि जब वह चुनाव प्रचार कर रहीं थी तब 3-4 ब्रांड्स उनसे डील तोड़ दी थी और फिर जब उन्होंने NRC का विरोध किया तब एक ब्रांड ने उन्हें बाहर निकाल दिया था।

Q.शार्ट फिल्म ‘दोबारा अलविदा’ से जुड़ने का मेन मकसद क्या रहा?
A.देखिए, ‘दोबारा अलविदा’ एक बहुत ही प्यारी कहानी है। मुझे लगता है कि यह एक ऐसा अनुभव है, जो दुनिया में हर किसी के साथ हुआ होगा। किसी ऐसे शख्स से अलविदा कहना, जिससे आपका करीबी का राब्ता रहा है, जिससे आप मोहब्बत करते हैं, उन्हें अलविदा कहना, फिर भी कुछ बकाया रह जाना, यह अनुभव हम सबको पता है। यह बड़ी रिलेटेबल कहानी है। वैसे तो डायरेक्टर शशांक सिंह मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं। उन्होंने हमेशा मेरी बड़ी मदद की है। मुझे पता था कि वे जिंदगी के पड़ाव में जब कदम उठाएंगे तब मैं उनका साथ दूंगी। लेकिन जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी, तब बहुत अच्छा लगा। एक होता है कि चलो, दोस्त के लिए कर रहे हैं। मगर एक होता है कि खुशी-खुशी शामिल होना चाहते हैं, क्योंकि यह बेहतरीन प्रोजेक्ट है। मेरे लिए बेहतरीन प्रोजेक्ट वाली बात थी, इसलिए मैं इसका हिस्सा बनने के लिए खुशी-खुशी तैयार हो गई। इसकी कहानी में भावनात्मक रूप से एक सादगी और सच्चाई है, जो मुझे पसंद आई। दूसरे गुलशन देवैया का नाम पता चला, तब और खुशी हुई, क्योंकि वे टैलेंटेड एक्टर हैं। उनके साथ मैंने काम नहीं की थी, इसलिए सोचा कि यह एक अच्छा मौका है।

Q.फिल्म में दो प्रेमी-युगल की मिलने-बिछड़ने की कहानी है। किसी दोस्त, नाते-रिश्तेदार के साथ मिलने-बिछड़ने का कोई वाकया साझा कीजिएगा, जो रोचक और मार्मिक हो?
A.खुशकिस्मती की बात है कि मुझे कभी ऐसे शख्स से गाड़ी या कैब में मुलाकात नहीं हुई है। जो मुलाकात हुईं, वहां मुझे पता था कि यह इंसान मिलने वाला है। अगर ऐसे पूछें तो मुझे अपने टीचर से मिलने में बहुत अच्छा लगता है, क्योंकि मेरी लाइफ में अच्छे टीचर्स रहे हैं। दरअसल, जब हम छोटे होते हैं, तब उन्हें डर, अथॉरिटी, डिसीप्लीन आदि के लिए जानते हैं। कभी उनकी इंसानियत नहीं पहचान पाते कि उस महिला का भी पति होगा, वह थक जाती होगी, उसकी भी कुछ महत्वाकांक्षाएं और अरमान होते होंगे। इस बारे में हम सोचते ही नहीं हैं। हम उस इंसान के बारे में जान रहे हैं, जो मार-डांट रहा है और सजा दे रहा है। अब अपनी टीचर से मिलती हूं, तब उनकी इंसानियत दिखाई पड़ती है। वह मुझे बहुत मार्मिक लगता है और मेरे दिल को छू जाता है। मुझे अपने टीचर से मिलना अच्छा लगता है।

Q.गुलशन देवैया के साथ काम करने की दिलचस्प बात क्या रही?
A.गुलशन की दिलचस्प बात यह है कि उनसे ज्यादा सिंसियर, मेहनती और शिद्दत से भरा एक्टर मैंने आज तक नहीं देखा। वे हर रोज कॉल टाइम से आधे घंटे पहले सेट पर पहुंच जाते थे, जबकि मैं लेट हो जाती थी। इस तरह जितने दिन शूटिंग चली उतने दिन मेरी शुरुआत गुलशन से माफी मांगने से ही हुई है। हम पास में ही रहते थे, इसलिए कुछ दिन बाद मैंने कहा कि निकलते वक्त आपको पिक कर लूंगी या फिर आप तब निकलना, जब आपको फोन करूंगी। उस दिन सुबह उठकर चाय पी ही रही थी कि गुलशन के फोन आने शुरू हो गए। उन्होंने हर दस मिनट पर मुझे जो फोन किया है तब मैंने कहा कि हे भगवान! ये लड़का…। फाइनली मैंने कहा कि अब तुम निकलो। फिर जब मैं सेट पर गई, तब वो कहने लगे कि स्वरा! तुम्हारी टाइम टेबल की वजह से मेरा तो बीपी हाई हो गया है। मैं अपने टाइम पर आऊंगा, तुम आराम से आना कोई दिक्कत नहीं है। वे इतने सिंसियर हैं कि हर काम शिद्दत से करते हैं। हमारा मजाक चलता रहता था कि तुम्हारे अंदर इतनी मैच्योरिटी है कि लगता है कि मेरी किसी साधु-संत से बात हो रही है या फिर मैं अपने दादा से एडवाइज लेने आ गई हूं। एक दिन तो मैंने डिसाइड किया कि उसका नाम बरगद रख देती हूं। बरगद के पेड़ की तरह अपनी जगह पर कायम और अटल होकर एक अर्से से दुनिया देख रहा हो, उसे सारी कायनात की सच्चाइयां पता हो। ये बातें मैंने गुलशन से ही सीखी हैं।

Q.आप बेबाक स्वभाव की हैं, जबकि बॉलीवुड इंडस्ट्री अलग ही दुनिया है। क्या इसका आपको कभी खामियाजा उठाना पड़ा?
A.जाहिर-सी बात है, हम जिस माहौल में रह रहे हैं। उसमें भय इतना है, ध्रुवीकरण इतना है कि जाहिर है इसका खामियाजा भुगतना तो पड़ा ही है। पहले मैं इस चीज को छुपाती थी, मुझे शर्म आती थी। फिर कहीं जा कर मुझे समझ आया कि इसमें मेरी गलती तो नहीं है। मैं तो उल्टा इस चीज की पीड़ित हूं। मुझे अपनी राय रखने के लिए पनिश किया जा रहा है। हमारे देश में संवैधानिक मूल्य या आदर्श हैं और उनकी बात करने के लिए अगर मुझे भुगतना पड़ रहा है, तब मैं क्या ही कह सकती हूं। इसमें तीन-चार ब्रांड थे, जिन्होंने मेरे साथ डील तोड़ दी। साल 2019 में छह प्रत्याशियों के लिए मैंने जो कैंपेन की थी। उसमें से कन्हैया, अमरा राम, दिग्विजय और आम आदमी पार्टी के तीन लोग थे। उसके बाद तीन-चार ब्रांड ने कहा कि हमें नॉन-पॉलिटिकल एक्ट्रेस चाहिए। इसके बाद एनआरसी प्रोटेस्ट के दौरान एक ब्रांड को एनडोर्स कर रही थी, उस ब्रांड ने कहा कि आप जिस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई हैं, उससे हमारे नाम की बेइज्जती हुई है। उन्होंने मुझे उस ब्रांड से निकाल दिया। इंडस्ट्री के कई लोगों ने मुझसे कहा कि देखो, लोग समझते हैं कि तुम बहुत कंट्रोवर्सियल हो, तुम ट्रबल हो, तुम्हें लेने से डरते हैं, अब मैं इन बातों का क्या कर सकती हूं। अब जिस पथ पर निकल चले हैं, उस पर जो कोई आएगा, उससे गुजरकर चलना पड़ेगा। मैं हमेशा यह मानती हूं कि मैं जो कुछ बोलती हूं, वह मजे के लिए तो बोल नहीं रही हूं। मैं इसलिए बोल रही हूं, क्योंकि उन चीजों में मेरा विश्वास है। यह मेरी आस्था है, ये मेरे आदर्श हैं, मेरे मूल्य हैं, अब उन चीजों के लिए थोड़ा भुगतना पड़े या उन चीजों के लिए खड़े होकर लड़ना पड़े, तब ठीक है। उतना तो करेंगे ही।

Q.लोगों के बीच आपकी तरह-तरह की इमेज है। अपनी तारीफ में क्या कहेंगी? आप किस तरह की लड़की हैं?
A.मेरे बारे में तो लोग बताएंगे। हां, सोशल साइट के जरिए पब्लिक के मन में मेरी जो कल्पना है, उससे काफी अलग हूं। लोग कहते हैं कि यह बहुत निडर, बेबाक लड़की है पर एक्चुअल में बड़ी डरपोक हूं। मुझे सबसे ज्यादा डर छिपकली से लगता है। मेरे कमरे में अगर छिपकली दिख गई, तो मैं पागल हो जाती हूं। लोग यह सुनकर बड़े सरप्राइज होते हैं। मैं बड़ी घरेलू लड़की हूं। मुझमें परचम, झंडा और मोर्चा…यह सब मेरे अंदर है। लेकिन घर-परिवार के मामले में मेरा कोई रिबेलीयन नहीं है।मुझे बच्चे, बूढ़े और रिश्तेदारियां बहुत पसंद हैं, इसे लेकर मेरे दोस्त मजाक उड़ाते रहते हैं कि तुम तो ऑलरेडी बहुत बड़ी बहू बनी हो। मैं काफी इजी गोइंग लड़की हूं और फैमिली से कनेक्टेड हूं। मुझे लड़ाइयां तो बिल्कुल पसंद नहीं है। मतलब आर्ग्यूमेंट और पॉलिटकल डिस्कशन करूंगी, लेकिन सच में लड़ाइयां जो होती हं, वह बिल्कुल पसंद नहीं है। उसे अवाइड करती हूं।

Q.अप्कमिंग फिल्म कौन-कौन सी हैं और उनमें आप किस तरह का किरदार निभा रही हैं?
A.मैं फिल्म ‘जहां चार यार’ कर रही हूं। इसका शूट अभी चल रहा है, लेकिन इसे कोविड-19 के चलते रोकना पड़ा। हमारी को-एक्टर मेहर विज को कोरोना हो गया था। हम सितंबर में गोवा वापस जाकर इसकी शूटिंग खत्म करेंगे। साथ ही फिल्म ‘शीर खोरमा’ अब इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में जा रही है। उसका एनाउंसमेंट आया है और यह हम सबके लिए खुशखबरी है।

Q.अब तक जितने किरदार निभाए, उसमें से सबसे ज्यादा किस किरदार से निकलने में ज्यादा टाइम लगा?
A.मुझे अनारकली ऑफ आरा के किरदार से निकलने में ज्यादा टाइम लगा। मैंने रियलाइज ही नहीं किया कि मेरे अंदर अनारकली किरदार का गुस्सा कितना भरा हुआ था। उस किरदार का मेरे अंदर कितना गुस्सा है। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि सारे टाइम मुझे गुस्सा क्यों आ रहा है। मैं इतनी नाराज क्यों रहती हूं। आखिर यह हो क्या रहा है! मैंने रियलाइज किया कि जब आप एक्टर होते हैं, तब किरदार में घुसने के लिए इतनी मेहनत करते हैं, लेकिन किरदार से निकलने के लिए कुछ नहीं करते। यह बात मैंने पहले कभी सोचा ही नहीं था। जब कैरेक्टर में इतना घुस जाओगे, तब जेहन उससे निकलने का रास्ता ढूंढ़ेगा, पर मैंने उसे निकलने का रास्ता दिया ही नहीं। विश्वास नहीं होता कि अनारकली ऑफ आरा के टाइम मैं लोगों से झगड़ा करती थी। मुझे इतना गुस्सा आता था, जबकि रियल लाइफ में, मैं झगड़ा करती ही नहीं हूं। इस बात को समझने के लिए मुझे एक साल लग गए कि आखिर मेरे साथ यह हो क्या रहा है। वो बहुत अजीब टाइम था। लेकिन अनारकली का किरदार इतना गुस्से से भरा था कि उसका मेरे ऊपर एक अलग असर हो गया था। फिर किरदार से निकलने के लिए मैंने एक तरीका निकाला था।

Q.आखिर आप किरदार से निकलने के लिए क्या तरीका अपनाती हैं?
A.एक रोल निभाने के बाद मैं छुट्‌टी पर चली जाती हूं। ट्रैवल करती हूं, कोई नई जगह पर जाती हूं और नॉर्मल जीवन से कट जाती हूं। तब मैं कुछ नया देखती और करती हूं। मेरी हमेशा कोशिश यही होती है कि दो फिल्मों के बीच एक छोटा सा वर्कशॉप हो। दूसरा, एक साइकोथेरेपी टाइप करती हूं। पॉर्पर तरीके से समझती हूं कि किरदार से क्या-क्या लिया, किस चीज से ज्यादा फर्क पड़ा। पहले के कुछ किरदारों में फर्क नहीं पड़ता था। जैसे ‘नील बट्‌टे सन्नाटा’ में मुझे निकलने की जरूरत ही नहीं पड़ी, क्योंकि वह इतना पॉजिटिव और खुशमिजाज किरदार था।

Q.फिल्म ‘शीर कोरमा’ करने के बाद आपका किस तरह से नजरिया बदला?
A.मैं हमेशा समान हक के पक्ष में रही हूं, चाहे वह समलैंगिक हो या कोई और हो। इसमें मेरा ऐसा कोई बड़ा नजरिया नहीं बदला है। यह लिंग को लेकर जो नॉन-बाइनरी जेंडर मामला है। कुछ लोग अपने आपको लड़का-लड़की नहीं, कुछ अलग ही मानना चाहते हैं। इस जेंडर मुद्दे के बारे में मुझे कुछ पता ही नहीं था। यह फिल्म करने के बाद इस पूरे मुद्दे को मैंने समझा और यह मेरे लिए एक बड़ी सीख रही थी।

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