Monday, August 2, 2021
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गाजियाबाद में मुस्लिम बुजर्ग की पिटाई के मामले में ट्विटर इंडिया के MD को नोटिस; पुलिस ने 7 दिन में थाने आकर बयान दर्ज कराने को कहा

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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मुस्लिम बुजुर्ग से मारपीट और अभद्रता के मामले में ट्विटर की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मामले में गाजियाबाद पुलिस ने ट्विटर के जिम्मेदार अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी कर ली है। इसी के मद्देनजर गाजियाबाद पुलिस ने ट्विटर इंडिया के मैनैजिंग डायरेक्टर मनीष माहेश्वरी को लीगल नोटिस भेजा है। यह नोटिस 17 जून यानी गुरुवार को भेजा गया है। पुलिस ने उन्हें 7 दिन के अंदर लोनी बॉर्डर पुलिस स्टेशन आकर बयान दर्ज कराने को कहा है।

नोटिस में क्या कहा?
पुलिस की ओर से जारी किए गए नोटिस में कहा गया है कि ट्विटर कम्यूनिकेशन इंडिया और ट्विटर INC के जरिए कुछ लोगों ने अपने ट्विटर हैंडल का प्रयोग करते हुए समाज में नफरत फैलाने की कोशिश की। इन कोशिशों को रोकने के लिए कंपनी की तरफ से कोई संज्ञान नहीं लिया गया और ऐसे समाज विरोधी संदेश को लगातार वायरल होने दिया गया। पुलिस ने स्पष्टीकरण देने के लिए ट्विटर को एक हफ्ते की मोहलत दी है।

3 पॉइंट में समझें- गाजियाबाद में क्या हुआ था?

  • उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद पुलिस ने लोनी इलाके में अब्दुल समद नाम के एक बुजुर्ग के साथ मारपीट और अभद्रता किए जाने का वीडियो वायरल होने के बाद ट्विटर समेत 9 पर FIR दर्ज की थी। इन सभी पर घटना को गलत तरीके से सांप्रदायिक रंग देने की वजह से यह एक्शन लिया गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है कि एक बुजुर्ग मुस्लिम को पीटा गया और उसकी दाढ़ी काट दी गई।
  • पुलिस के मुताबिक, मामले की सच्चाई कुछ और ही है। पीड़ित बुजुर्ग ने आरोपी को कुछ ताबीज दिए थे, जिनके परिणाम न मिलने पर नाराज आरोपी ने इस घटना को अंजाम दिया। लेकिन, ट्विटर ने इस वीडियो को मैन्युप्युलेटेड मीडिया का टैग नहीं दिया। पुलिस ने यह भी बताया कि पीड़ित ने अपनी FIR में जय श्री राम के नारे लगवाने और दाढ़ी काटने की बात दर्ज नहीं कराई है।
  • जिन लोगों पर मामला दर्ज किया गया है, उनमें अय्यूब और नकवी पत्रकार हैं, जबकि जुबैर फैक्ट चेकिंग वेबसाइट ऑल्ट न्यूज का लेखक है। डॉ. शमा मोहम्मद और निजामी कांग्रेस नेता हैं। वहीं, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष उस्मानी को कांग्रेस ने पिछले साल अक्टूबर-नवंबर में बिहार विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार के रूप में उतारा था।

कटघरे में ट्विटर क्यों?
FIR में लिखा गया कि गाजियाबाद पुलिस की ओर से स्पष्टीकरण जारी करने के बावजूद आरोपियों ने अपने ट्वीट्स डिलीट नहीं किए, जिसके कारण धार्मिक तनाव बढ़ा। इसके अलावा ट्विटर इंडिया और ट्विटर कम्यूनिकेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से भी उन ट्वीट को हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए। इनके खिलाफ IPC की धारा 153, 153-A, 295-A, 505, 120-B, और 34 के तहत FIR दर्ज की गई है।

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