Tuesday, September 21, 2021
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तटबंध को जहां रेत रही नदी वहां कोई मरम्मत नहीं, जहां सुरक्षित वहां खर्च किए करोड़ों रुपए

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नदी के दबाव को झेल पाएगा यह बांध? 60 लाख लोगों की अटकी हैं सांसें। - Dainik Bhaskar

नदी के दबाव को झेल पाएगा यह बांध? 60 लाख लोगों की अटकी हैं सांसें।

कोसी में बाढ़ का सीजन आ गया हैं। बांध की सुरक्षा से जुड़े जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों ने तैयारी उस जगह पर की है जहां इस बार कोसी का थ्रेट नहीं दिख रहा। और जहां नदी की धारा बांध को दरेरने के करीब है, वहां कोई तैयारी नहीं है। सहरसा जिले के तीन डिविजनों (सुपौल, चन्द्रायण और कोपरिया) में पड़ने वाले 53 कि.मी. लंबे कोसी पूर्वी बांध की सुरक्षा की स्थिति देख कर अनायास सवाल कौंध गया … बालू की भीत की तरह खड़ा 125 कि.मी. लंबा (भीमनगर-वीरपुर से कोपरिया तक) पूर्वी बांध कोसी के दबाव को झेल पाएगा भी कि नहीं ? देश के सबसे बड़े तटबंधों में एक कोसी तटबंध की अग्निपरीक्षा हर साल बाढ़ के दिनों में होती है। बाढ़ की घोषित अवधि 15 जून से 15 अक्टूबर तक कोसी प्रमंडल के 60 लाख से अधिक लोगों की सांसें अटकी रहती हैं।

लोग बस एक ही सवाल पूछते रहते हैं कि क्या इस साल बांध सुरक्षित रह पाएगा ? कोसी की धारा बांध के करीब पहुंची तो अत्यधिक डिस्चार्ज को झेल पाना बस भगवान की कृपा पर ही निर्भर होगा क्योंकि, मानसून पहली बारिश में ही पूर्वी बांध पर बलबा, नौलखा, शाहपुर, के समीप बने एक दर्जन रेन कट से बालू से खड़े किए गए कमजोर बांध की स्थिति सामने आ गई है। खतरनाक रेनकटों को समय रहते मजबूत नहीं किया गया तो कोसी के अत्यधिक दबाव को बांध शायद ही झेल पाएगा। इस क्षेत्र के लोग 5 सितंबर 1984 को नवहट्‌टा हेमपुर के निकट मिट्‌टी के तटबंध के बह जाने के बाद हुई तबाही को नहीं भूल पाए हैं। अब तो बांध रेत पर खड़ा है।

ये बांध नहीं...बालू की भीत... न टूटे तो कोसी की कृप

ये बांध नहीं…बालू की भीत… न टूटे तो कोसी की कृप

कुसहा त्रासदी के बाद बांध की मजबूती का हुआ था फैसला…लेकिन जमीन पर नहीं हुआ काम

2008 में कुसहा त्रासदी के बाद राज्य सरकार ने पूर्वी और पश्चिमी कोसी तटबंध के मजबूतीकरण , पक्की करण और ऊंची करण का निर्णय लिया था। आंध्र प्रदेश की बशिष्ठा कंपनी को 534 करोड़ का ठेका दिया गया। कंपनी बीच में ही काम छोड़ कर भाग गई। कंपनी ने कोसी नदी के किनारे की रेत पर ही बांध को 5 से 6 फीट उंचा तो कर दिया लेकिन जब बारिश होती है तो बालू की भीत की तरह बांध की परत दर परत खुलती जा रही है।

6 कि.मी. के दायरे में कोसी तटबंध के काफी करीब
नवहट्‌टा प्रखंड क्षेत्र में पड़ने वाले करीब 6 कि.मी. के दायरे (78.30 से 83.40 कि.मी.) में ही कोसी की धारा तटबंध के करीब से बहती है। इसके बाद कोसी राजनपुर से आगे तक अभी बांध से दूर बह रही है जो गंभीर खतरे का संकेत नहीं है। नवहट्‌टा प्रखंड से सहरसा जिले की सीमा से बांध की स्थिति का जायजा लेने के दौरान एक बात उभर कर आयी कि कोसी इसबार वहां खतरा बढ़ा सकती है वहां सुरक्षात्मक कार्य किया ही नहीं गया है।

इधर, पिछले दो तीन वर्षों से पूर्वी तटबंध के पुराना बांध पहाड़पुर के समीप 78.30 कि.मी. बिन्दु पर दबाव बना चुकी कोसी इसबार यहां अभी तक शांत दिख रही है। लोगों ने कहा कि इस बिन्दु से 3 कि.मी. दूर बरियाही गांव के समीप सिल्टेशन से नदी ने धारा बदल ली है। हलांकि इसबार भी इस बिन्दु पर जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों ने बांध सुरक्षा के नाम पर 3 करोड़ 46 लाख खर्च किया है।

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